क्षेत्रीय
16-Mar-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। आर्यसमाज वसुंधरा विहार, बहतराई रोड में रविवार को साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ से हुई। यज्ञ के पश्चात प्रमोद गुप्ता और संध्या शर्मा ने ईश्वर भक्ति से ओत-प्रोत भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश से आए आर्य शत्रुघ्न तोमर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व को आर्य अर्थात श्रेष्ठ बनाना ही स्वामी दयानंद सरस्वती का लक्ष्य था। उन्होंने कहा कि समाज को श्रेष्ठ बनाने के लिए पहले स्वयं और अपने परिवार को आर्य बनाना आवश्यक है, तभी एक सशक्त आर्य राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। कार्यक्रम के अंत में आचार्य जयदेव शास्त्री ने नवरात्रि और सनातन नववर्ष की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष में दो बार ऋतु परिवर्तन होता है और बसंत ऋतु में प्रकृति में व्यापक बदलाव दिखाई देता है। शास्त्रों के अनुसार यथा ब्रह्मांडे तथा पिंडे अर्थात जैसा परिवर्तन ब्रह्मांड में होता है, वैसा ही शरीर में भी होता है। इसलिए नवरात्रि में उपवास, औषधियों का सेवन, ध्यान-भजन और सत्संग के माध्यम से शरीर, मन और बुद्धि को शुद्ध करना आवश्यक है। आचार्य शास्त्री ने बताया कि नवदुर्गा के नाम भी विभिन्न औषधियों से जुड़े हैं, जैसे हरड़ को शैलपुत्री, ब्रह्मी को ब्रह्मचारिणी, चंदसूर को चंद्रघंटा, पेठा (राखिया) को कुष्मांडा, अलसी को स्कंदमाता, तुलसी को महागौरी और शतावरी को सिद्धरात्रि कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सनातन नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसी दिन सृष्टि की उत्पत्ति मानी जाती है। शाम को लिंगियाडीही रामनगर में अश्वनी जायसवाल के निवास पर भी हवन-सत्संग आयोजित कर लोगों को भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रति जागरूक किया गया। अंत में सभी को संकल्प दिलाया गया कि वे अपनी संस्कृति को अपनाते हुए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही नववर्ष मनाएंगे और हर घर हवन कर वातावरण को शुद्ध बनाएंगे। मनोज राज 16 मार्च 2026