इस्लामाबाद,(ईएमएस)। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल का सबसे बड़ा खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना पड़ रहा है। कतर से होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से पाकिस्तान में 14 अप्रैल के बाद गैस की उपलब्धता समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने सीनेट की पेट्रोलियम कमिटी को सूचित किया है कि कतर से होने वाला आयात 2 मार्च से निलंबित है। गौरतलब है कि अमेरिका के बाद कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक है। मार्च के लिए निर्धारित आठ कार्गो में से केवल दो ही पाकिस्तान पहुंच सके हैं, जबकि अप्रैल में आने वाले छह कार्गो के पहुंचने की भी कोई संभावना नहीं है। युद्ध की वजह से प्रमुख समुद्री जलमार्गों पर जहाजों की आवाजाही रुकने से दुनिया भर की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 2022 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। गैस की इस भारी किल्लत को दूर करने के लिए पाकिस्तान अब अजरबैजान से स्पॉट मार्केट के जरिए गैस खरीदने पर विचार कर रहा है, लेकिन यह सौदा देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डालेगा। कतर के साथ अनुबंध के तहत जो गैस 9 डॉलर प्रति यूनिट मिलती थी, वह अब खुले बाजार में 24 डॉलर प्रति यूनिट पड़ेगी। इस महंगी खरीद का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे जनता को मिलने वाली बिजली और भी महंगी हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के अनियंत्रित होने का असर केवल गैस तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 55 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक वृद्धि कर दी है। ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी के आंकड़े बताते हैं कि 7 मार्च से अब तक डीजल की कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत और पेट्रोल में 70 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। वैश्विक स्तर पर हाई-स्पीड डीजल 88 डॉलर से उछलकर 187 डॉलर प्रति बैरल और पेट्रोल 74 डॉलर से बढ़कर 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। आपूर्ति बाधित होने और आसमान छूती कीमतों ने पाकिस्तान के सामने एक गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे फिलहाल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/17मार्च2026