- पश्चिम एशिया में तनाव से शिपिंग प्रभावित, व्यापार मंडल ने आरबीआई को लिखा पत्र कोलकाता (ईएमएस)। भारत वाणिज्य मंडल (बीसीसी) ने भारतीय निर्यातकों को पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वित्तीय राहत देने के लिए उपाय करने का आग्रह किया है। मंडल ने कहा कि यह क्षेत्र न केवल भारतीय निर्यात का प्रमुख गंतव्य है, बल्कि यूरोप और अफ्रीका जाने वाले माल के लिए महत्वपूर्ण ‘ट्रांस-शिपमेंट’ केंद्र भी है। वर्तमान में जहाजों के मार्ग बदल रहे हैं, बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ रही है, माल भाड़ा और बीमा लागत बढ़ गई है, और परिवहन अवधि लंबी हो गई है। इससे निर्यातकों की कार्यशील पूंजी और नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ा है। बीसीसी ने आरबीआई से बैंकों को निर्यातकों के लिए सहायक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है। इसमें शामिल हैं: - कार्यशील पूंजी सीमा बढ़ाना और तदर्थ ऋण प्रदान करना। - शिपमेंट से पहले और बाद में निर्यात ऋण की अवधि बढ़ाना। - ‘पैकिंग क्रेडिट’ में अधिक लचीलापन। - निर्यात बिल की देय तिथियों को बढ़ाना। - ऋण अदायगी पर स्थगन अवधि को 2026 की पहली और दूसरी तिमाही तक बढ़ाना। - शिपिंग में देरी के कारण भुगतान पर दंडात्मक ब्याज से बचाना और ब्याज समानीकरण योजना के लाभ सुरक्षित रखना। - परिवहन अवधि वाले निर्यात बिल के लिए समय को सामान्य परिवहन अवधि + 60 दिन तक बढ़ाना। - बिल डिस्काउंटिंग सुविधाओं में स्पष्टता और मजबूती लाना। बीसीसी ने चेताया कि नाशवंत और मौसमी फैशन उत्पादों से जुड़े निर्यातक विशेष रूप से प्रभावित हैं। शिपमेंट में देरी होने पर मौसमी मांग का समय निकल जाने से माल का मूल्य घट सकता है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। बीसीसी ने कहा कि इन उपायों से निर्यातकों को वित्तीय स्थिरता और संचालन में राहत मिलेगी, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के वर्तमान व्यवधान को प्रभावी ढंग से झेला जा सकेगा। सतीश मोरे/17मार्च ---