काठमांडू (ईएमएस)। नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना हुई है। भूमिका श्रेष्ठ नेपाल की पहली महिला ट्रांसजेंडर सांसद बनी हैं। उनका जन्म 1987 में काठमांडू के नैकाप में हुआ था और जन्म के समय उनका नाम कैलाश श्रेष्ठ था। परिवार, समाज और स्कूल में भेदभाव और अपमान के कारण उन्हें नौवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी। 2005 में उन्होंने काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय से ‘कैलाश श्रेष्ठ’ नाम और ‘अन्य’ लिंग के साथ नागरिकता प्राप्त की। नेपाल में तीसरे लिंग को कानूनी मान्यता मिलने के बाद, भूमिका ने महिला पहचान के लिए नागरिकता संशोधन की मांग की। 5 अप्रैल 2021 को मंत्रिपरिषद के फैसले के अनुसार उनकी नागरिकता में संशोधन कर ‘भूमिका श्रेष्ठ’ नाम और ‘महिला’ लिंग दर्ज हुआ। भूमिका लंबे समय से लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने ब्लू डायमंड सोसाइटी के माध्यम से समुदाय के अधिकारों की आवाज बुलंद की और अपने अनुभवों पर आधारित ‘भूमिका: तेस्रो लिंगीको आत्मकथा’ नाम की पुस्तक लिखी। इसके अलावा, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लैंगिक समानता के क्षेत्र में दुनिया के टॉप 100 युवाओं में शामिल किया गया। राजनीति में उनकी नई भागीदारी नेपाल की समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने उन्हें समानुपातिक सूची से चुना, जिससे वे संसद में लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों और मुद्दों को नीति-निर्माण स्तर पर उठाने में सक्षम होंगी। उनका उद्देश्य संवैधानिक अधिकारों को व्यवहार में लागू कर, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सार्वजनिक संस्थानों में इन समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। भूमिका केवल लैंगिक और यौनिक अल्पसंख्यक समुदाय तक सीमित नहीं हैं। वे मधेसी, मुस्लिम, आदिवासी, दिव्यांग और अन्य पिछड़े समुदायों के भीतर मौजूद अल्पसंख्यकों के मुद्दों को भी उठाना चाहती हैं। उनका मानना है कि नीति-निर्माण में इन समुदायों की भागीदारी समाज में व्यापक स्वीकार्यता और न्याय को बढ़ाएगी। राजनीतिक सफर में भूमिका पमंत्री को रोकते हुए बोले बिरला......“आप भाषण क्यों दे रहे हैं? जितना पूछा जाए उतना जवाब दें लोकसभा ने विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन रद्द किया नई दिल्ली (ईएमएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों और मंत्रियों से संक्षिप्त संवाद करने की अपील फिर से की। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर देते समय लंबा भाषण दे रहे थे, तब लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने उन्हें रोकते हुए कहा, “आप भाषण क्यों दे रहे हैं? जितना पूछा जाए उतना जवाब दें। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि प्रश्नकाल में समय का सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए उन्हें संक्षिप्त उत्तर देने की कोशिश करनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे संक्षिप्त प्रश्न पूछें ताकि सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न समय पर पूछे जा सकें। प्रश्नकाल के दौरान ही उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि “समय कम है, मंत्रीजी को लंबा जवाब देना है,” ताकि सदन में कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके। इसके साथ ही लोकसभा ने विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन रद्द किया। ये सांसद बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के कारण निलंबित किए गए थे। निलंबन रद्द करने का प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजीजू ने रखा, इस प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। इसके पहले कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सांसदों के आचरण पर खेद जताया। निलंबन के कारण तीन फरवरी को बजट सत्र के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा आसन की ओर कागज फेंकना और अन्य असभ्य व्यवहार था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल थे। निलंबन के दौरान ये सांसद संसद के मकर द्वार पर धरना देते रहे। इस घटनाक्रम से स्पष्ट हुआ कि लोकसभा अध्यक्ष का प्रयास सदन की कार्यवाही को समयबद्ध और व्यवस्थित बनाना है, जबकि निलंबन रद्द करने से विपक्ष और सरकार के बीच सामंजस्य का संकेत भी मिला। आशीष दुबे / 17 मार्च 2026