जब फुजैराह पर ईरान का हमला हुआ तब जग लाडकी में तेल लोड हो रहा था नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। भारतीय झंडे वाला कच्चा तेल टैंकर जग लाडकी बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी कर सुरक्षित मुंद्रा बंदरगाह पहुँचा है। खास बात यह है कि यह तेल टैंकर रविवार सुबह फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुआ था, इसके एक दिन पहले ही बंदरगाह के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था, जिससे वहाँ का काम-काज कुछ समय के लिए रुक गया था। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि 14 मार्च, 2026 को जब हमला हुआ, तब यह तेल टैंकर फुजैराह के सिंगल पॉइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था। भारत ने कहा, 14 मार्च, 2026 को, जब भारतीय झंडे वाला जहाज जग लाडकी कच्चा तेल लोड कर रहा था, तभी फुजैराह के तेल टर्मिनल पर हमला हो गया। यह जहाज़ रविवार को भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैराह से सुरक्षित रूप से रवाना हुआ और अपने साथ लगभग 80,800 टन मुरबान कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। खास बात यह है कि शिवालिक और नंदा देवी के बाद, यह तीसरा ऐसा भारतीय जहाज़ है जो संघर्ष से प्रभावित क्षेत्र से पूरी तरह सुरक्षित निकल आया है। ये तेल टैंकर तब भारत पहुँचे हैं जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। खबरों के मुताबिक, ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य में भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिलाया है, जबकि साथ ही उसने यूएई के बंदरगाहों पर संभावित हमलों की चेतावनी दे दी है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि मौजूदा संघर्ष के दौरान, यह अहम समुद्री रास्ता अमेरिका और इज़रायल के जहाज़ों के लिए बंद रहेगा। इसके पहले, भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकर शिवालिक और नंदा देवी होरमुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते कुल 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुँचे थे। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन ने बताया कि नंदा देवी देवभूमि द्वारका जिले के वाडिनार बंदरगाह पर लंगर डाल चुका है, और एलजीपी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) को एक छोटे जहाज (डॉटर शिप) में स्थानांतरित करने की तैयारियाँ चल रही हैं। उन्होंने कहा, 46,500 मीट्रिक टन एलपीली की एक खेप लाई गई है; यह कार्गो जहाज में स्थानांतरित किया जाएगा, जो बाद में पूर्वी तट पर स्थित एन्नोर (तमिलनाडु) और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) के बंदरगाहों पर इस खेप का कुछ हिस्सा उतारेगा। उन्होंने कहा, स्थानांतरण की प्रक्रिया 1,000 टन प्रति घंटे की दर से होती है; इसलिए, इस पूरे काम को पूरा होने में दो दिन लगने की उम्मीद है। सिंह ने बताया कि बंदरगाह मंत्रालय के निर्देशानुसार, वाडिनार स्थित बंदरगाह प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा गया है कि ये सभी काम पूरी दक्षता के साथ पूरे हों। गुजरात के मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बावजूद, एलपीजी कैरियर शिवालिक होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए मुंद्रा बंदरगाह तक सुरक्षित पहुँच गया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व नेताओं के साथ मज़बूत कूटनीतिक संबंधों के कारण संभव हो पाया। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों और उसके जवाब में तेहरान की जवाबी कार्रवाई से पहले, भारत के कच्चे तेल के आयात का आधे से ज़्यादा हिस्सा, गैस का लगभग 30 प्रतिशत और एलपीजी का 85-90 प्रतिशत आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे मध्य-पूर्वी देशों से आता था। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026