राष्ट्रीय
18-Mar-2026


जबलपुर,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ने गेस्ट फैकल्टी के नियमितीकरण से जुड़ी याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 291 संविदा सहायक प्राध्यापकों, स्पोर्ट्स ऑफिसर्स और लाइब्रेरियनों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक कार्य करने से किसी कर्मचारी को नियमित नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। याचिकाकर्ताओं, जिसमें डॉ. कमल प्रताप सिंह सहित अन्य शामिल थे, ने मांग की थी कि उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से नियमित किया जाए, सभी सेवा लाभ दिए जाएं और नई भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से शासकीय कॉलेजों में कार्यरत हैं और यूजीसी मानकों के अनुसार पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल 50 हजार रुपये मानदेय मिलता है। साथ ही, हर वर्ष 89 दिन के अनुबंध पर नियुक्ति और फिर पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई जाती है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि गेस्ट फैकल्टी को नियमित भर्ती में अवसर देने के लिए आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। कोर्ट ने इसे उचित माना और कहा कि स्थायी नियुक्ति केवल वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव है। अदालत ने नियमित भर्ती प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए “फॉलन आउट” नियम को भी सही माना। इसके अनुसार, नियमित नियुक्ति होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनी रूप से उचित है, क्योंकि यह पदों को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट फैकल्टी को आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, ताकि वे नियमित भर्ती में शामिल हो सकें। सरकार ने कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक वैधानिक आयोग के माध्यम से होती है। नियमों के विपरीत कोई भी नियुक्ति असंवैधानिक होगी। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना। “फॉलन आउट” नियम को भी सही ठहराया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में “फॉलन आउट” नियम को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि नियमित भर्ती होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनन सही है, क्योंकि यह पद को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026