राष्ट्रीय
18-Mar-2026


बेंगलुरु (ईएमएस)। कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के.शिवकुमार के बीच जारी कथित खींचतान के बीच विधायकों ने भी मोर्चा खोल दिया है। बीत दिनों बेंगलुरु के होटल में हुई दो अलग-अलग मुलाकातों ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। सत्ताधारी पार्टी के करीब 45 विधायकों ने शांगरी-ला होटल में मुलाकात की, ताकि वे सिद्धारमैया मंत्रिमंडल में शामिल होने की अपनी संभावनाओं पर चर्चा कर सकें। रात के खाने के बाद हुई बैठक के बाद, विधायकों ने 26 मार्च को नई दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मिलने का फैसला किया। बैठक में शामिल विधायक ने कहा, हम या पहली या दूसरी बार विधायक बने हैं। हम मुख्यमंत्री और एआईसीसी को एक ज्ञापन सौंपने वाले हैं, जिसमें हममें से कुछ के लिए मंत्रिमंडल में जगह की मांग करने वाले है। 2028 के चुनावों से पहले, हमें सरकार के भीतर चल रही राजनीतिक दरार पर भी स्पष्टता चाहिए। वहीं दूसरी समानांतर बैठक में, बेंगलुरु विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और चार बार के विधायक एन.ए. हारिस ने कई वरिष्ठ कांग्रेस विधायकों के साथ मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात कर उन्हें सरकार में उन्हें शामिल करने की मांग की। ये राजनीतिक घटनाक्रम तब सामने आए, जब कुछ ही दिन पहले 25 से ज़्यादा कांग्रेस विधायक निजी होटल में रात के खाने के लिए इकट्ठा हुए थे, जिससे कर्नाटक के मुख्यमंत्री में संभावित बदलाव को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। सूत्रों के अनुसार, 12 मार्च की बैठक में विधायकों ने पार्टी की बिगड़ती छवि पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने चेतावनी दी कि आंतरिक मुद्दे 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में सरकार की संभावनाओं पर असर डाल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि बैठक तब हुई, जब मुख्यमंत्री विधान सौध में मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। 4 मार्च को, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे मुख्यमंत्री के साथ सत्ता की खींचतान में उलझे हुए हैं, ने कहा कि वे धैर्य रख रहे हैं और मुख्यमंत्री के पद को लेकर कोई क्रांति लाने का उनका कोई इरादा नहीं है। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026