कैलिफोर्निया (ईएमएस)। भविष्य में लोग पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में भी छुट्टियां मनाते दिखाई दे सकते हैं और यह क्षेत्र पर्यटन उद्योग का नया आयाम बन सकता है। पिछले कुछ वर्षों में निजी अंतरिक्ष कंपनियों की पहल से करीब 100 पर्यटक अंतरिक्ष की यात्रा कर चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बढ़ती रुचि को देखते हुए अंतरिक्ष में होटल बनाने की योजनाओं पर भी तेजी से काम हो रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में लोग पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर जीरो-ग्रैविटी वाले कमरों में ठहरकर अनोखा अनुभव ले सकेंगे। दुनिया के पहले स्पेस होटल के रूप में चर्चित वोयागेर स्टेशन को कैलिफोर्निया की कंपनी एबोव स्पेस विकसित कर रही है। यह स्पेस स्टेशन एक विशाल घूमते हुए पहिये के आकार का होगा। इसके घूमने से बनने वाली सेंट्रीफ्यूगल फोर्स के कारण इसके भीतर रहने वाले लोगों को चंद्रमा जैसा कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण महसूस होगा। इससे वहां मौजूद लोग सामान्य तरीके से चल-फिर सकेंगे और रोजमर्रा की गतिविधियां जैसे खाना-पीना या अन्य काम आसानी से कर पाएंगे। करीब 50 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस स्पेस होटल में लगभग 400 मेहमानों और क्रू मेंबर्स के ठहरने की व्यवस्था होगी। यहां अमीर पर्यटक निजी विला भी खरीद सकेंगे। इसके अलावा जिम, बार, सिनेमा हॉल और रेस्टोरेंट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी, जहां पर्यटकों को पृथ्वी जैसा भोजन परोसा जाएगा। इस परियोजना को 2027-28 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके निर्माण पर अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसी दिशा में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को निजी कंपनियों के लिए खोलने की योजना पर काम कर रही है, ताकि वहां कमर्शियल होटल और लैब स्थापित किए जा सकें। इस दिशा में एक्सियोम स्पेस का पहला मॉड्यूल अंतिम चरण में बताया जा रहा है, जिसका इंटीरियर प्रसिद्ध फ्रांसीसी डिजाइनर फिलिप्प स्ट्राक ने तैयार किया है। इसमें हाई-स्पीड वाई-फाई जैसी सुविधाएं भी होंगी, जिससे पर्यटक अंतरिक्ष से ही सोशल मीडिया पर लाइव हो सकेंगे। हालांकि अंतरिक्ष में होटल चलाना आसान नहीं होगा। भोजन, पानी, कचरा प्रबंधन और सुरक्षा जैसी कई तकनीकी चुनौतियों से निपटना होगा। वैज्ञानिक ऐसे विशेष मटेरियल पर काम कर रहे हैं जो छोटे अंतरिक्षीय कणों से होने वाले नुकसान को खुद ही ठीक कर सकें। फिलहाल अंतरिक्ष पर्यटन बेहद महंगा माना जाता है। एक टिकट की कीमत 20 से 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 165 से 415 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा यात्रियों को लगभग 15 से 20 सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग भी लेनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में तकनीक के विकास के साथ यह यात्रा अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है, लेकिन फिलहाल यह अनुभव केवल बेहद संपन्न पर्यटकों के लिए ही संभव है। बता दें कि ब्रह्मांड के अनंत सन्नाटे में आने वाले वर्षों में इंसानी मौजूदगी और हलचल बढ़ सकती है। अब तक अंतरिक्ष को मुख्य रूप से वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अध्ययन का क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन तेजी से विकसित हो रही स्पेस टूरिज्म इंडस्ट्री इसे दुनिया के सबसे महंगे और रोमांचक पर्यटन स्थलों में बदलने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। सुदामा/ईएमएस 19 मार्च 2026