क्षेत्रीय
20-Mar-2026
...


आयुष्मान योजना के नाम पर पहले जीता विश्वास, फिर की एक लाख रुपए की डिमांड परिजनों का हंगामा—बकाया राशि के लिए शव को रोकने की शिकायत अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, जांच में जुटी पुलिस बालाघाट (ईएमएस). नगर के वार्ड नंबर 33 गायखुरी स्थित सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। एक ओर जहां हाल ही में गलत इंजेक्शन से युवक के कोमा में जाने का मामला सुर्खियों में था, वहीं अब एक और सनसनीखेज आरोप सामने आया है। मारपीट में घायल युवक की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर पैसों के लिए शव रोकने और जबरन वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों के अनुसार, रूपझर थाना क्षेत्र के ग्राम नारंगी निवासी 26 वर्षीय संदीप मरकाम को 18 मार्च की रात गंभीर हालत में सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के दौरान अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में ऑपरेशन और दवाइयों के नाम पर करीब 50 हजार रुपये वसूल लिए गए। इतना ही नहीं, मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा करीब 1 लाख रुपये की और मांग की गई। पैसे नहीं देने पर अस्पताल प्रबंधन ने शव नहीं दिया। पुलिस हस्तक्षेप के बाद शव प्रदान किया गया। पैसे दो, तभी मिलेगा शव-परिजनों का आरोप मृतक के भाई रंजित मरकाम ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अतिरिक्त रकम देने में असमर्थता जताई, तो अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इंकार कर दिया। उनका कहना है कि स्पष्ट तौर पर कहा गया कि पूरी रकम चुकाने के बाद ही शव सौंपा जाएगा। इधर, घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने न्याय की मांग करते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाई। अस्पताल प्रबंधन की सफाई, आरोप झूठे, शव पुलिस को सौंपा वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि शव परिजनों को नहीं, बल्कि पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंपा गया है। प्रबंधन का दावा है कि मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। न्यूरा सर्जन डॉ प्रिंस वर्मा के अनुसार सिर में चोट लगने के कारण रक्त का बड़ा से क्लॉट जम गया था, जिसका ऑपरेशन किया गया था। मृतक के परिजनों से किसी भी प्रकार से अनाधिकृत रुप से पैसों की मांग नहीं की गई थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से जानकारी दी गई कि यह एमएलसी से जुड़ा हुआ मामला था, जिसके कारण शव सीधे परिजनों को न देकर पुलिस को सौंपा गया। पुलिस ने शव का पीएम कराकर परिजनों को दिया है। अस्पताल की ओर से किसी भी प्रकार के पैसों की मांग नहीं की गई। काफी कम राशि जमा करने के बाद भी मरीज का ऑपरेशन किया गया था। जंगल में विवाद के बाद साथ श्रमिक ने किया था हमला परिजनों ने बताया कि संदीप मरकाम रूपझर थाना क्षेत्र के घोंदी जंगल में एक ट्रक में लकड़ी भरने का कार्य कर रहे थे। दोपहर में काम के दौरान भोजन ग्रहण करने के समय शराब के नशे में उसका साथी श्रमिक से विवाद हो गया। उसके साथी मजदूर अर्जुन टेकाम ने उस पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। जिसके कारण वह गंभीर रुप से घायल हो गया था। गंभीर हालत में उसे पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से हालत खराब होने पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर किया गया। जिसके बाद बालाघाट शहर के ही सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 19 मार्च की अलसुबह उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच जारी, कई सवाल बरकरार मामले में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में अस्पताल ने पैसों के लिए शव रोका? आयुष्मान योजना के नाम पर वसूली हुई या नहीं? और यदि ऐसा हुआ तो आखिर इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी? फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और मानवीय संवेदनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। भानेश साकुरे / 20 मार्च 2026