- हाईकोर्ट ने दी जवाब पेश करने सशर्त मोहलत, आगे की कार्यवाही 23 मार्च को तय होगी ग्वालियर, ईएमएस। मध्यप्रदेश उचच न्यायालय की ग्वालियर पीठ में चल रहे एक अवमानना मामले में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया की संयुक्तपीठ ने कुछ प्रतिवादियों को अंतरिम राहत दिए जाने का संज्ञान लिया, वहीं दोषी अधिकारी सब रजिस्ट्रार(उप पंजीयक) मानवेन्द्र भदौरिया को 25,000 की कॉस्ट जमा करने की शर्त पर अपना बचाव पेश करने की अनुमति दे दी। अपने आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिए कि आदेशों की अवहेलना को हल्के में नहीं लिया जाएगा, लेकिन यदि कोई अपनी गलती स्वीकार करता है, तो उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत अवसर भी दिया जा सकता है। प्रकरण के मुताबिक ग्वालियर में स्थित एक जमीन के लंबित दावे को लेकर उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ के अंतरिम आदेश के बाद भी सरिता सिंह और माधुरी साहू ने 11 जून 2024 को विवादित जमीन कृष्णा सिंह यादव और सुरेश सिंह यादव को बेच दी। इस जमीन के विक्रय पत्र का निष्पादन सब रजिस्ट्रार (उप पंजीयक) मानवेन्द्र भदौरिया ने किया था। 6 मार्च 2026 को न्यायालय ने माना था कि उच्च न्यायालय के 9 सितम्बर 2016 और 2 दिसंबर 2016 के अंतरिम आदेशों के बाद ही जमीन को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की गई। इस पर न्यायालय ने उक्त विक्रय पत्र के निष्पादन को अवैध ठहराते हुए जमीलन के नामंतरण को भी रद्द करने के आदेश ग्वालियर कलेक्टर को दिए थे। उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 6 मार्च 2026 को दिए आदेश में सरिता सिंह, माधुरी साहू, कृष्णा यादव, सुरेश सिंह यादव और सब रजिस्ट्रार मानवेन्द्र सिंह भदौरिया को उक्त आदेश की नाफरमानी का दोषी पाते हुए 20 मार्च को सजा के मुद्दे पर हाजिर होने कहा था। मामले में 20 मार्च को हुई सुनवाई पर अधिवक्ता प्रशांत शर्मा ने न्यायालय को अवगत कराया कि प्रतिवादी कृष्णा यादव और सुरेश सिंह यादव ने एकलपीठ के 6 मार्च 2026 के आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। जिस पर संयुक्तपीठ ने 17 मार्च 2026 को आदेश पारित करते हुए पहले के आदेश पर स्टे लगा दिया और कृष्णा यादव और सुरेश सिंह यादव के खिलाफ किसी भी प्रकार की कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश श्री अहलूवालिया की एकलपीठ ने संयुक्तपीठ के आदेश को ध्यान में रखते हुए कहा कि मामले में प्रतिवादी कृष्णा यादव और सुरेश सिंह यादव के खिलाफ कार्यवाही फिलहाल अलग रखी जाएगी और अपील के अंतिम निर्णय के बाद ही आगे बढ़ेगी। इसके अलावा सब रजिस्ट्रार मानवेन्द्र भदौरिया के मामले में एकलपीठ ने पाया कि उनको पहले नोटिस प्राप्त हुआ था, इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर कोई जवाब नहीं दिया। 6 मार्च के आदेश के खिलाफ उन्होंने कन्टेंम्प्ट अपील दायर की थी, जो बाद में वापस ले ली गई। सब रजिस्ट्रार ने अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांगी और अपनी गलती स्वीकार की। इस पर न्यायालय ने कहा कि चूंकि सब रजिस्ट्रार ने नोटिस के बावजूद जवाब नहीं दिया,लिहाजा यह गंभीर लापरवाही है। उनके द्वारा गलती स्वीकार करने और माफी मांगने को देखते हुए एकलपीठ ने उन पर 25,000 की कॉस्ट जमा करना अनिवार्य कर यह राशि दो दिनों के भीतर कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने के निर्देश देकर मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 तय कर दी। न्यायालय ने उक्त सुनवाई पर सरिता सिंह, माधुरी साहू और सब रजिस्ट्रार मानवेन्द्र भदौरिया को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देेश स्पष्ट किया कि सब रजिस्ट्रार भदौरिया के जवाब पर विचार किया जाएगा और फिर सजा के मुद्दे पर भी सुनवाई होगी।