:: सुशासन एवं विकास को नई गति देगा स्टेट एआई मिशन; डेटा आधारित निर्णयों से सशक्त होगा मध्यप्रदेश :: जयपुर/इंदौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रदेश में सुशासन को नई ऊँचाई देने और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी व नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए शीघ्र ही मध्यप्रदेश स्टेट एआई मिशन प्रारंभ किया जाएगा। यह मिशन राज्य के एआई विजन एंड एक्शन फ्रेमवर्क पर आधारित होगा, जिसके माध्यम से सरकारी सेवाओं को प्रेडिक्टिव (पूर्वानुमान आधारित) और डेटा-ड्रिवन बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग मानवीय निगरानी (ह्यूमन-इन-द-लूप) के साथ किया जाएगा, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। स्टेट एआई मिशन के क्रियान्वयन से विशेषकर किसानों, ग्रामीण समुदायों और युवाओं को व्यक्तिगत व स्मार्ट सेवाएँ उपलब्ध होंगी। कृषि क्षेत्र में एआई आधारित गिरदावरी और जीआईएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से फसल मैपिंग व उपज आकलन सटीक होगा, जिससे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता आएगी। सुमन सखी कार्यक्रम के जरिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की एआई आधारित निगरानी की जा रही है, वहीं एमपी कौशल रथ से युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है। :: मिशन का चरणबद्ध क्रियान्वयन :: वर्ष 2026-27 : वर्तमान एआई पहलों का एकीकरण और आधारभूत तैयारी सुदृढ़ करना। वर्ष 2027-28 : सफल यूज़ केसेस (प्रयोगों) को विभिन्न विभागों में व्यापक स्तर पर लागू करना। वर्ष 2028 से : एआई को शासन की एक स्थायी संस्थागत क्षमता के रूप में स्थापित करना। :: प्रेडिक्टिव गवर्नेंस और डेटा मैनेजमेंट :: मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई मिशन से स्वास्थ्य, पोषण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान संभव होगी। प्रशासनिक कार्यों को दक्ष बनाने के लिए अधिकारियों को ड्राफ्टिंग, विश्लेषण और डिसीजन सपोर्ट के लिए आधुनिक एआई टूल्स दिए जाएंगे। संपदा 2.0 और एमपी ई-सेवा जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फेस रिकग्निशन और रियल-टाइम ट्रैकिंग से नागरिक सेवाएँ अब और भी सुलभ होंगी। :: कौशल विकास पर विशेष जोर :: राज्य सरकार स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर एक मजबूत एआई इकोसिस्टम तैयार करेगी। युवाओं और शासकीय अधिकारियों के लिए विशेष एआई स्किलिंग कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के सिद्धांत पर चलते हुए एआई को प्रयोगशाला से निकालकर पब्लिक गुड (जनहित) के रूप में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाएगा। प्रकाश/21 मार्च 2026