-फ्रांस की चाल, राफेल डील पर सहूलियत देने से किया इनकार, भारत चिंतित नई दिल्ली (ईएमएस)। फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करने के लिए भारत फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले भारत ने एयरफोर्स के लिए 36 और नौसेना के लिए 26 राफेल खरीदे हैं। इसके बावजूद फ्रांस भारत को इस डील में वह सहूलियत नहीं दे रहा है जिसका वह हकदार है। दरअसल, दुनिया के हथियार बाजार में राफेल को चमकाने वाला भारत ही है। भारतीय वायु सेना ने ही सबसे पहले राफेल को एक शानदार विमान बताया था। भारतीय एयरफोर्स के सर्टिफिकेशन के दम पर ही फ्रांस ने दुनिया के बाजार में अपने इस जेट की मार्केटिंग की और जमकर ऑर्डर बटोरे, लेकिन अब भारत के साथ डील में उसने फिर एक चाल चल दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि भारत को क्यों नहीं अपने फिफ्थ जेन फाइटर जेट एम्का प्रोजेक्ट का इंतजार करना चाहिए? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुश्मनों से घिरा है। चीन की एयरफोर्स पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट से लैस है। वहीं पाकिस्तान भी खूब उछल रहा है। दूसरी तरफ भारतीय एयरफोर्स फाइटर जेट्स की भारी कमी से जूझ रही है। दरअसल, इस कमी के पीछे को लापरवाही नहीं बल्कि परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। भारत की योजना अपना फाइटर जेट बनाकर दूसरों पर निर्भरता कम करने की थी। इसी क्रम में भारत तेजस और एम्का प्रोग्राम चला रहा है, लेकिन कुछ बाहरी दिक्कत यानी अमेरिका के कारण तेजस प्रोग्राम अपनी गति से नहीं चल रहा है। तेजस श्रेणी के विमानों ने अमेरिका जीई कंपनी के इंजन लगाए जाने हैं लेकिन वह इसकी सुचारू आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। इस कारण तेजस प्रोग्राम अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है। भारत तेजस मार्क-1ए और तेजस मार्क-2 विमान बना रहा है जो 4.5 पीढ़ी के जेट हैं। तेजस मार्क-2 को 4.5+ पीढ़ी के राफेल के टक्कर का जेट बताया जा रहा है। इस बीच भारत अपना फिफ्थ जेन एम्का प्रोग्राम चला रहा है। सरकार की योजना 2035 तक इस विमान को हर हाल में एयरफोर्स के बेड़े में शामिल करने का है लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रहा है। इन परिस्थितियों में फ्रांस से 114 राफेल काफी अहम हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अगर नजर दौड़ाएं तो भारत के सामने बहुत सीमित विकल्प है। भारत अमेरिकी फाइटर जेट नहीं खरीदता क्योंकि उनका रख रखाव बहुत महंगा है। इतना ही नहीं भारत के पास अधिकतर हथियार रूस निर्मित हैं। भारत फ्रांस से 114 राफेल विमानों के लिए करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील करने जा रहा है। ऐसी रिपोर्ट आई थी कि इन विमानों के करीब 50 फीसदी कलपुर्जे भारत में बनेंगे। इससे विमान को भविष्य में अपग्रेड करना और इसमें भारतीय हथियार लगाना आसान होगा। एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस भारत के साथ अहम सोर्स कोड साझा नहीं करेगा। एक रिपोर्ट में दावा किया है कि कंपनी राफेल के थेल्स आरबीई2 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकी स्कैंड अरे रडार, मॉड्यूलर डाटा प्रोसेसिंग यूनिट और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट के सोर्स कोड शेयर नहीं करेगी। मॉड्यूलर डाटा प्रोसेसिंग यूनिट को फाइटर जेट का दिमाग कहा जाता है। इन तीन चीजों के बिना विमान एक डब्बा से ज्यादा कुछ नहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांसीसी अधिकारी मानते हैं कि ये सोर्स कोड बेहद संवेदनशील हैं। इनको बनाने में कई वर्षों का समय लगा है। इसमें कहा गया है कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन यानी भारत में विमान को बनाने के बावजूद इसको अहम सोर्स कोड पर फ्रांस का कंट्रोल रहेगा यानी सोर्स कोर्ट पर फ्रांसीसी कंट्रोल होने से भारत इन फाइटर जेट्स में देसी हथियारों जैसे ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम या अन्य हथियार तैनात नहीं कर पाएगा। ऐसा करने के लिए उसे पहले फ्रांस से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि इतना महंगा विमान खरीदने के बावजूद भारत को इतनी छूट नहीं मिलेगी तो फिर हमारे लिए यह विमान किस काम के। यह एक तकनीकी मुद्दा है। फ्रांस को ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि दुनिया में इतनी बड़ी संख्या में राफेल विमान खरीदने वाला भारत एक मात्र देश है। सिराज/ईएमएस 23 मार्च 2026