राष्ट्रीय
23-Mar-2026
...


गुवाहाटी(ईएमएस)। चुनाव से पहले नेताओं का आवागमन मुकाबले को कड़ा और रोचक बना देता है। असम में भी कुछ इसी तरह की तस्वीर दिखाई देने लगी है। यहां सत्ताधारी दल भाजपा को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब हिमंत बिस्वा सरमा सरकार में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री रहीं नंदिता गरलोसा ने रविवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस का दामन थाम लिया। भाजपा द्वारा इस बार उनका टिकट काटे जाने से वे काफी समय से नाराज चल रही थीं। नंदिता गरलोसा का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए इसलिए भी बड़ी हार माना जा रहा है क्योंकि उन्हें मनाने की कोशिशें खुद मुख्यमंत्री स्तर पर की गई थीं। रविवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद हाफलोंग पहुंचे और गरलोसा के आवास पर जाकर उनसे लंबी चर्चा की। हालांकि, मुख्यमंत्री की यह मान-मनौव्वल नाकाम रही। जैसे ही मुख्यमंत्री उनके घर से निकले, उसके कुछ ही घंटों बाद गरलोसा ने कांग्रेस मुख्यालय पहुंचकर पार्टी की सदस्यता ले ली। इस बगावत की मुख्य वजह भाजपा द्वारा हाफलोंग सीट से उम्मीदवार का बदलना है। पार्टी ने मौजूदा विधायक और मंत्री नंदिता गरलोसा का टिकट काटकर इस बार रुपाली लांगथासा को अपना नया चेहरा बनाया है। इसी फैसले से आहत होकर गरलोसा ने कमल का साथ छोड़ दिया और अब वे अपनी पुरानी सीट हाफलोंग से ही कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरेंगी। गरलोसा का स्वागत करते हुए असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव निर्मल लंगथासा ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में सच बोलने की सजा दी जाती है। लंगथासा ने कहा कि मुख्यमंत्री को आदिवासियों की जमीनें बड़ी कंपनियों को बेचने में दिलचस्पी है, जबकि गरलोसा जनता के हितों के लिए लड़ती रहीं। कांग्रेस सोमवार को आधिकारिक रूप से उनकी उम्मीदवारी की घोषणा करेगी, जिससे अब हाफलोंग सीट पर रुपाली लांगथासा और नंदिता गरलोसा के बीच सीधा और रोचक मुकाबला तय माना जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस/23मार्च2026 --------------------------------