अंतर्राष्ट्रीय
24-Mar-2026


वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक गोपनीय और निर्णायक फोन कॉल ने मध्य पूर्व के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया है। इस बातचीत के बाद ही ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी गई, जिसके परिणामस्वरूप 28 फरवरी को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू हुआ। इस सैन्य अभियान का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला परिणाम ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के रूप में सामने आया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू ने ट्रंप को विश्वास दिलाया था कि खामेनेई को उनके तेहरान स्थित कंपाउंड में निशाना बनाने का यह सबसे सटीक समय है, जिससे न केवल एक तानाशाही व्यवस्था का अंत होगा, बल्कि ट्रंप की हत्या की साजिशों का बदला भी लिया जा सकेगा। इस सैन्य कार्रवाई की भूमिका कई महीनों से तैयार की जा रही थी। जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे, जिसे ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की समाप्ति बताया था। हालांकि, दिसंबर में मार-ए-लागो में हुई बैठक और फरवरी में वाशिंगटन यात्रा के दौरान नेतन्याहू ने ट्रंप को ईरान के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल खतरे से आगाह किया। वेनेजुएला में अमेरिकी सफलता और ईरान के भीतर भड़के नागरिक विद्रोह ने ट्रंप को कड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। अंततः 27 फरवरी को ट्रंप ने अंतिम आदेश जारी किए और अगले ही दिन तेहरान पर बमबारी शुरू हो गई, जिसमें खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि हुई। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस व्यापक ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन क्षमता, उसकी नौसेना और परमाणु हथियारों के विकास की संभावनाओं को पूरी तरह नष्ट करना था। साथ ही, ईरान समर्थित प्रॉक्सी गुटों की कमर तोड़ना भी अमेरिका और इजराइल की प्राथमिकता थी। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और प्रतिशोध का हिस्सा थी, क्योंकि ईरान ने पूर्व में अमेरिकी नेतृत्व को निशाना बनाने के प्रयास किए थे। हालांकि इजराइल ने इस बात से इनकार किया कि उसने अमेरिका को युद्ध में घसीटा, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले की पूरी जिम्मेदारी स्वयं पर ली। हमले के चार सप्ताह बाद, पूरा क्षेत्र एक भीषण युद्ध की चपेट में है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी सहयोगियों पर हमले किए हैं, जिसमें अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों और 2300 से अधिक ईरानी नागरिकों की जान जा चुकी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान में अब मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है, जो अपने पिता से भी अधिक कट्टर अमेरिका-विरोधी माना जाता है। ट्रंप ने ईरानी जनता से विद्रोह की अपील की है, लेकिन सड़कों पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की तैनाती और भारी तनाव ने इस अभियान को ट्रंप की विदेश नीति का सबसे जोखिम भरा कदम बना दिया है। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026