लेख
25-Mar-2026


करोना काल ने अनेक दुख बढ़ाये सामाजिक, आर्थिक, मानसिक व सार्वजनिक इस छुतही बीमारी ने सारे रिश्ते नाते औपचारिक/ अनौपचारिक कार्यक्रमों सब में पलीता लगा दिया । मुझे मार्च 2020 में फागुनी रसरंग कवि सम्मेलन हेतु आमंत्रित किया गया पत्र मिलते ही मैंने बाकायदा प्रचार प्रसार आरंभ कर दिया वरिष्ठ कवियों रचनाकारों को यह पत्र दिखाकर कहती आजकल, जनता परिवर्तन पसंद करती है देखिए, यह पत्र बड़े-बड़े नामवर कवि /कवित्रियों को छोड़कर मुझे आमंत्रित किया है लोग अब पुराने लोगों से ऊब गए हैं, नए चेहरे नई आवाज, नव विचारों को सुनना चाहते हैं ।वरिष्ठ नखरे भी दिखाते हैं और पैसा भी ज्यादा मांगते हैं। पर मुझे इस प्रसिद्ध कवि सम्मेलन में आमंत्रित कर मेरा तो मान बढ़ा दिया। मेरी साहित्य संघ की बहनों ने मेरा पत्र पढ़कर लौटाते हुए कहा- आजकल *हमने छोटी मोटी जगह जाना बंद कर दिया है इतनी छोटी जगह जाकर तो हमारा स्टेटस गिरता है ना*श्रुति जी आप जाइए मुबारक हो आपको। फिर दूसरे ही दिन आयोजन समिति के कर्ता-धर्ता का पत्र मिला हमारे कवि सम्मेलन सभा के प्रेसिडेंट का हार्ट फेल हो गया है जिससे यह कार्यक्रम स्थगित किया जा रहा है, अब निकट भविष्य में जब भी कवि सम्मेलन होगा हम आपको खबर करेंगे। मेरी तो चार दिन की छुट्टी व्यर्थ हो गई दो दिन कार्यक्रम की तैयारी में दो दिन प्रचार- प्रसार में, पर *मरता क्या न करता नाम का नशा ही ऐसा होता है*। कुछ समय बाद हमारे नगर की एक प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ने एक वृहद कार्यक्रम रखा जो पूरे सप्ताह चलना था अध्यक्ष जी ने मुझसे कहा हम एक कवि सम्मेलन रखना चाहते हैं जिसमें आप की भी सहभागिता होगी ,पहले दिन रखें या अंतिम दिन मुझे लगा लोगों को धीरे-धीरे पता चलेगा तब अंतिम दिन भीड़ ज्यादा होगी *कवि /कवित्रियाँ तो श्रोताओं की भीड़ व तालियों के भूखी होती हैं* अंतिम दिवस भीड़ ज्यादा रहेगी तो कह दिया आप तो बाद में रखिएगा ,वे बोले पारिश्रमिक हम वहीं पर कार्यक्रम के बाद देंगे। मैं तो खुश हो गई पतिदेव से बोली चलिए जी नई पिक्चर लगी है पी वी आर में देख आते हैं आज हम बहुत खुश हैं बड़ा कार्यक्रम मिला है रकम भी मोटी मिलेगी, पतिदेव बोले अरे क्या पिक्चर अभी ₹500 खर्च हो जाएंगे पता नहीं कितना पैसा मिलना है पता चला बहुत कम मिला और हम फालतू खर्च कर अपना बजट बिगाड़ लें। हम पिक्चर नहीं गए पर ऑफिस में सबको कैंटीन में पार्टी देकर अनावश्यक खर्च कर ही दिया हम प्रतिदिन अखबार में इस संस्था के कार्यक्रमों को पढ़ते और उत्साहित होते और आज क्या कार्यक्रम होना है यह ध्यान से देखते, क्योंकि उसमें हमारा कवि सम्मेलन एवं हमारा नाम भी तो छपेगा । पर किस्मत को तो कभी-कभी हमारी खुशी मंजूर नहीं होती , अगले दिन हमने अखबार में पढ़ा कि कोरोना के कुछ केस बढ़ने के कारण कवि सम्मेलन स्थगित किया जा रहा है। संक्रमण न बढे इसलिए समस्त कार्यक्रम रद्द किए जा रहे हैं कहीं पर भी भीड़ एकत्रित ना हो सभी अपने मुख पर मास्क लगाकर रखें यह खबर पढ़कर हमें गहन दुख का सामना करना पड़ा सारे मंसूबों पर पानी जो फिर गया था। कोरोना का प्रभाव कम होने लगा था जहां-तहां नए -नए कार्यक्रम प्रारंभ हो गए थे शहर की एक प्रतिष्ठित संस्था प्रतिवर्ष अखिल भारतीय कवि सम्मेलन करती है उसे सुनने कई हजारों लोग दूर-दराज से आते हैं बहुत ही ख्याति लब्ध इस कवि सम्मेलन से आमंत्रण पत्र आया मेरी तो खुशी का ठिकाना ना रहा जिस मंच पर पढ़ने का सपना मैंने बरसों से देखा था, जिस पर देश के नामी-गिरामी रचनाकारों ने काव्य पाठ किया था यह प्रति वर्ष विशेष अवसर पर होता था, एवं पूरी रात कवि सम्मेलन चलता था इसकी विशेषता यह थी कि जनता भी सारी रात बड़े मनोयोग से सुनती व आनंद लेती थी। आयोजक का फोन आया मैडम जी वैसे तो हम कई वर्षों से आपका नाम प्रस्तावित करते हैं किंतु कोई ना कोई स्थानीय कवि/ कवित्रियाँ आपकी बुराई बताकर नाम कटवा देते हैं इस बार में नहीं माना, मैंने कहा मैडम श्रुति जी की आवाज इस बार इस मंच से अवश्य गूंजेगी। *मुझे लगा आप एक बार आ गई और मंच पर छा गई तो हर बार बुलाना पक्का हो जाएगा* मैडम आप बताइए आप कितनी राशि लेंगी। हमेशा बुलाए जाने का सुनकर मैंने कम राशि बताई और उन्होंने इसे सहमति दे दी- बोले आधी रकम हम एडवांस भेज देते हैं आप अकाउंट नंबर दे दीजिए बाकी रकम वहां मंच पर लिफाफे में सौंप देंगे, मैं तो पहले से ही प्रसन्न थी बोली अरे सर एडवांस की क्या जरूरत है हम आ जाएंगे वहीं सब हो जाएगा आप टेंशन ना लें। इस विशाल अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जाना था तो कपड़े भी सुंदर -सोवर होने चाहिए ,ढंग का मोबाइल हो या टेबलेट हो, जिसमें देखकर पढ़ सकूं, एक आकर्षक हैंडबैग लेना पड़ेगा ,चश्मे का खूबसूरत फ्रेम भी तो लेना पड़ेगा। इन सब चीजों में काफी खर्चा कर दिया सोचा कोई बात नहीं नाम भी तो मिलेगा अखबारों के फ्रंट पेज पर कवरेज होगी पूरा शहर जान जाएगा हम क्या है* सारी तैयारियां हो चुकी थी निश्चित तिथि के एक दिन पूर्व संयोजक महोदय का व्हाट्सएप मैसेज आया संस्था के सदस्य दो दिन पहले आपस में भिड़ गए बहुत मारपीट हुई आपसी तनाव की स्थिति देखकर कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सभी आगंतुक कवियों को दो दिन पूर्व सूचना दे दी गई आप स्थानीय हैं इसलिए आज बता पाया हम क्षमा चाहते हैं ।अगले कार्यक्रम में आपको जरूर याद रखेंगे। पतिदेव को बताया तो वे भड़क उठे क्या मैडम आप भी ऐसा क्या बचपना की एडवांस लेने से मना कर दिया जब वे एडवांस दे रहे थे तो क्यों नहीं लिया बेवजह इतना खर्चा हो गया दो दिन बाद *स्थानीय कवियत्री ने पूछा आप कवि सम्मेलन पढ़ने नहीं आई हम रात भर आपकी प्रतीक्षा करते रहे क्या स्वास्थ्य वगैरह खराब हो गया था* उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा आ गया मैंने तुरंत संयोजक को फोन लगाया और कहा तुम्हें शर्म नहीं आती मुझे कांट्रैक्ट किया और कार्यक्रम स्थगित का मैसेज कर दिया और कार्यक्रम चलता रहा संयोजक बोला क्या ?कौन सा मैसेज मैंने तो नहीं भेजा पर पर अब पूरी बात समझ में आ गई कि उस दिन मेरा मोबाइल संस्था में छूट गया था आपके किसी विरोधी ने ही मेरे फोन से आपको कार्यक्रम स्थगन मैसेज भेज दिया होगा ,मैं इतना व्यस्त था कि कई दिनों से मैसेज भी नहीं देख पाया मैं आपसे करबद्ध क्षमा मांगता हूं और पता लगाता हूं कि यह किसकी हरकत थी । *मैं सर पर हाथ रख कर सोचने लगी कि हाय रे किस्मत खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना* *संसार में कई प्रकार के दुख हैं पर यह कार्यक्रम स्थगन का महान दुख मेरी अकेली आत्मा को सहन करना पड़ा*। .../ 25 मार्च /2026