आज का भारत वैश्विक क्षितिज पर एक ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र की भाँति उभर रहा है, जिसकी चमक से दुनिया की महाशक्तियाँ भी चकित हैं। अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल डगलस मैकग्रेगर का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह सुझाव देना कि युद्ध विराम और शांति स्थापना के लिए उन्हें भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से संपर्क साधना चाहिए, केवल एक बयान मात्र नहीं है, बल्कि यह बदलते विश्व क्रम की उस हकीकत का प्रमाण है जहाँ भारत अब एक मूक दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति बन चुका है। यह स्वीकारोक्ति भारत की उस बढ़ती साख को रेखांकित करती है जिसने वैश्विक राजनीति के समीकरणों को पुनर्परिभाषित कर दिया है। वर्तमान भारत जिस अवस्था में पहुँच चुका है, वह उसे वैश्विक शांति के लिए दुनिया भर के नेताओं के बीच आशा का एक सशक्त केंद्र बिंदु बनाती है। भारत की यह मान्यता और प्रतिष्ठा केवल हवा-हवाई दावों पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ठोस कूटनीतिक सफलताएँ और सामरिक कौशल की गाथाएँ छिपी हैं। दुनिया के सबसे संवेदनशील जल क्षेत्रों और बंदरगाहों, विशेषकर जलडमरू मध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर जहाँ आज भी युद्ध की विभीषिका के कारण बड़े-बड़े विकसित देशों के तेल वाहक जहाज और मालवाहक पोत बारूदों का शिकार हो रहे हैं या वहां से गुजरने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, वहीं भारत के तिरंगे के साथ चलने वाले तेल वाहक विमान और पोत निर्बाध रूप से अपनी मंजिल तक पहुँच रहे हैं। यह दृश्य भारत की उस अदृश्य शक्ति और विश्वसनीयता को दर्शाता है जिसे दुनिया की कोई भी ताकत चुनौती देने का साहस नहीं कर पा रही है। यहाँ तक कि ईरान के कट्टर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश भी भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और उसके बढ़ते प्रभाव के आगे खुद को असहज और विरोध करने में असमर्थ पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वसुधैव कुटुंबकम के अपने पुरातन मंत्र को आधुनिक कूटनीति का आधार बनाया है। इसी का परिणाम है कि जहाँ एक ओर इजरायल जैसा शक्तिशाली और तकनीकी रूप से समृद्ध राष्ट्र भारत को अपना सबसे विश्वसनीय मित्र मानता है, वहीं दूसरी ओर अरब जगत और ईरान जैसे देशों के साथ भी भारत के संबंध मधुरता और सम्मान के नए पायदान चढ़ रहे हैं। जब रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध की ज्वाला भड़की और पूरी दुनिया दो धड़ों में बँट गई, तब केवल भारत ही वह शक्ति था जिसने दोनों पक्षों की आँखों में आँखें डालकर अपने हितों की बात की। हज़ारों भारतीय नागरिकों और छात्रों के युद्ध क्षेत्र में फंसे होने की खबर ने पूरे देश को चिंतित कर दिया था, लेकिन यह प्रधानमंत्री मोदी का ही ओजस्वी व्यक्तित्व और भारत की साख थी कि दोनों युद्धरत देशों ने भारत के आग्रह पर अस्थायी रूप से युद्ध विराम किया ताकि भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सके। ऑपरेशन गंगा की सफलता ने दुनिया को दिखा दिया कि नए भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए वह किसी भी सीमा तक जा सकता है। ऐसा ही दृश्य ईरान में भी देखने को मिला जब अमेरिकी हमलों और अशांति के माहौल के बीच ईरानी सरकार ने भारतीयों की सुरक्षित निकासी में अभूतपूर्व सकारात्मक रुख दिखाया। यह सम्मान किसी डर से नहीं, बल्कि उस विश्वास से उपजा है जो भारत ने अपनी निष्पक्ष और शांतिपूर्ण नीतियों के जरिए वैश्विक मंच पर कमाया है। आज जब हम वैश्विक परिदृश्य को देखते हैं, तो एक बहुत ही व्यापक और स्पष्ट तस्वीर उभरती है कि दुनिया के तमाम देश चाहे आपस में कितने ही विरोधाभासों या युद्धों में क्यों न उलझे हों, लेकिन वे भारतीय नागरिकों और भारत सरकार के प्रति अटूट सम्मान का भाव रखते हैं। यह भारतीय कूटनीति की वह विजय है जहाँ हमने बिना किसी गुटबाजी में फंसे, अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ हाथ मिलाया है। घरेलू स्तर पर भले ही राजनीतिक मतभेदों के कारण विपक्षी दल अपने निजी स्वार्थों या सत्ता की ललक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार की आलोचना करते रहें, लेकिन जमीनी हकीकत और अंतरराष्ट्रीय मंच की गवाही कुछ और ही कहानी बयां करती है। सत्य यह है कि वर्तमान भारत अब केवल अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूसरों की ओर नहीं देखता, बल्कि दुनिया की बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। सदियों बाद ही सही, भारत एक बार फिर तेजी से विश्व गुरु के पद की ओर अग्रसर हो रहा है। इस नए भारत के पास अब केवल पुरातन ज्ञान ही नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, मजबूत अर्थव्यवस्था, अडिग नेतृत्व और अटूट संकल्प शक्ति भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता ने भारत को एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है जहाँ भारत की आवाज को न केवल सुना जाता है, बल्कि उसका अनुसरण भी किया जाता है। वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति अब औपचारिकता नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गई है। चाहे वह जलवायु परिवर्तन का मुद्दा हो, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई हो या फिर ग्लोबल सप्लाई चेन को स्थिर रखने की चुनौती, भारत की भूमिका अग्रणी रहती है। भारत की यह नई सामर्थ्य प्रत्येक भारतीय के मन में गर्व और आत्मविश्वास का संचार करती है। आज का भारतीय नागरिक दुनिया के किसी भी कोने में गर्व से अपना सिर उठाकर कह सकता है कि वह उस महान देश का हिस्सा है जो युद्ध को खत्म करने की क्षमता रखता है और जो मानवता के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहता है। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक नेतृत्व का वह अद्भुत संगम है जिसने हमें वैश्विक राजनीति के ध्रुव तारे के रूप में स्थापित कर दिया है। इस महान राष्ट्र की बढ़ती शक्ति किसी को डराने के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और समृद्धि के मार्ग पर ले जाने के लिए है। वास्तव में, यह भारत का स्वर्ण युग है जहाँ हमारी सीमाओं के बाहर हमारा मान बढ़ा है और सीमाओं के भीतर देश का स्वाभिमान अपनी चरम सीमा पर है। भारत का यह बढ़ता कद और प्रधानमंत्री मोदी का यशस्वी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी विरासत स्थापित कर रहा है, जिसमें भारत फिर से दुनिया का मार्गदर्शन करने वाला सिरमौर राष्ट्र कहलाएगा। (लेखक अनेक समाजसेवी और स्वयं सेवी संस्थाओं के केंद्र बिंदु हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के मध्य प्रदेश के संयोजक हैं। आपने विभिन्न विषयों पर केंद्रित अनेक साहित्यों का सृजन किया है।) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 25 मार्च /2026