गुना (ईएमएस)। गुना की जिला अदालत ने करीब साढ़े पांच साल पुराने एक चर्चित सुसाइड केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश राघवेन्द्र भारद्वाज की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे अपराधों के लिए कोई स्थान नहीं है, जहाँ प्रताडऩा के चलते किसी को अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ेे। सजा पाने वालों में बार एसोसिएशन के वर्तमान उपाध्यक्ष व अधिवक्ता विक्रम बोहरे और अरविंद जैन शामिल हैं। क्या था पूरा घटनाक्रम? मामला 8 अक्टूबर 2020 का है, जब गुना के माथुर कॉलोनी निवासी अर्जुन किरार ने अपने मित्र उदय जोशी के घर स्थित दुकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना वाली रात अर्जुन ने उदय के घर रुकने की बात कही थी क्योंकि उन्हें सुबह जल्दी भोपाल निकलना था। अगली सुबह जब उदय के पुत्र कार्तिक ने उन्हें जगाने का प्रयास किया, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी मशक्कत के बाद जब दरवाजा तोड़ा गया, तो अर्जुन का शव पंखे से लटका मिला। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें मृतक ने कुछ रसूखदार लोगों द्वारा पैसों के लेनदेन को लेकर दी जा रही निरंतर धमकियों और मानसिक प्रताडऩा का मार्मिक उल्लेख किया था। कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और फैसला पुलिस की लंबी विवेचना के बाद सात आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक आशाकिरण कौर ने प्रभावी पैरवी करते हुए दलील दी कि आरोपियों के दबाव के कारण एक युवक को उस समय आत्मघाती कदम उठाना पड़ा जब उसकी पत्नी गर्भवती थी। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया, जबकि विक्रम बोहरे (51) और अरविंद जैन को धारा 306 के तहत दोषी पाया। न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अपराधियों को ऐसा दंड मिलना चाहिए जिससे समाज में एक कड़ा संदेश जाए और भविष्य में कोई इस तरह का कृत्य करने का साहस न करे। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर सात-सात साल की जेल के साथ 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस फैसले के बाद कानूनी गलियारों और शहर के प्रबुद्ध वर्गों में चर्चाओं का बाजार गर्म है, क्योंकि सजा पाने वाले आरोपियों में से एक वरिष्ठ अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी हैं।। - सीताराम नाटानी