राष्ट्रीय
26-Mar-2026


सरकार का दावा- भारत में तेल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में, देश में 60 दिन का तेल भंडार मौजूद हकीकत: देशभर में गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लगी कतार, गुजरात और मध्यप्रदेश में स्थिति सबसे अधिक खराब एलपीजी, पेट्रोल-डीजल की मारामारी नई दिल्ली(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण दुनिया भर में संकट गहराता जा रहा है। देश में भी इसे लेकर लोगों में पैनिक फैल रहा है। हालांकि सरकार की ओर से परेशान न होने और स्थिति कंट्रोल में होने की बात कही गई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि देश में पेट्रोलियम और एलपीजी (एलपीजी) की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और दुष्प्रचार पर ध्यान न दें, जिसका उद्देश्य बेवजह घबराहट पैदा करना है। वहीं हकीकत यह है कि देशभर में गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतार लगी हुई है। गुजरात और मध्यप्रदेश में तो स्थिति सबसे सबसे अधिक खराब है। देश का कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जहां एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के लिए मारामारी न देखने को मिल रही है। यूपी में पेट्रोल और डीजल की किल्लत की अफवाह फैलने से अफरातफरी मच गई। स्थानीय निवासियों के बीच यह खबर फैल गई कि एलपीजी के बाद अब ईंधन की कमी होने वाली है और जल्द ही लॉकडाउन लग जाएगा। इस डर से लोग अपनी गाडिय़ों और बड़े-बड़े गैलनों में तेल भरवाने पहुंच गए। कोई टंकी में तेल लेने आया तो कोई ड्रम में। स्थिति बेकाबू होते देख कई पेट्रोल पंप मालिकों ने अपनी टंकियां बंद कर दीं। देशभर में स्थिति चिंताजनक सरकार के लाख दावे के बाद भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं। इसका परिणाम यह देखने को मिल रहा है कि मप्र, छत्तीसगढ़ सहित देशभर के राज्यों से हैरान करने वाली तस्वीरें आ रही हैं। इंदौर में सोशल मीडिया पर अचानक से पेट्रोल खत्म होने से संबंधित मैसेज चलने लगे। जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित वाहन चालकों को लगी तो वे इंदौर शहर के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल भरवाने के लिए पहुंच गए। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं। देवास जिले के पीपलरावां थाना क्षेत्र अंतर्गत चौबाराधीरा गांव में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाह फैलने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण केन और कुप्पियां लेकर पेट्रोल पंप पहुंच गए। ईंधन पहले लेने की होड़ में लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ लोगों के बीच लात-घूंसे तक चलने लगे। भविष्य की असुरक्षा के डर से 500 से 1500 रुपए तक का पेट्रोल डलवा रहे हैं। घबराहट का आलम यह है कि लोग अपनी गाडिय़ों की टंकियां फुल कराने के साथ-साथ घरों में सुरक्षित रखने के लिए 20 से 50 लीटर के प्लास्टिक केन लेकर पंपों पर पहुंच रहे हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कुल मिलाकर 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडारण (कवर्न) शामिल हैं। मंत्रालय ने बताया कि मध्य पूर्व संकट के 27वें दिन भी देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल पंप मालिकों को राहत सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ जगहों पर घबराहट में ईंधन खरीदने की घटनाएं सामने आईं, लेकिन सरकार ने इसे सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक वीडियो का परिणाम बताया। इसके बावजूद सभी उपभोक्ताओं को ईंधन उपलब्ध कराया गया और तेल कंपनियों ने रातभर डिपो चलाकर सप्लाई बढ़ाई। सरकार ने पेट्रोल पंप मालिकों को राहत देते हुए क्रेडिट सीमा 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन कर दी है, ताकि कार्यशील पूंजी की कमी के कारण किसी भी पंप पर ईंधन की कमी न हो। मंत्रालय ने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की मौजूदा स्थिति के बावजूद भारत को अपने 41 से अधिक वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। देश की सभी रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हैं और अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले से तय है। एलपीजी आपूर्ति भी पूरी तरह सुरक्षित एलपीजी को लेकर भी सरकार ने किसी तरह की कमी से इनकार किया है। मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उत्पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे रोजाना उत्पादन 50 हजार मीट्रिक टन(टीएमटी) तक पहुंच गया है, जो कुल आवश्यकता का 60 प्रतिशत से अधिक है। अब आयात की दैनिक जरूरत घटकर 30 टीएमटी रह गई है। इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से 800 टीएमटी एलपीजी की खेप पहले से रास्ते में है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगी। सरकार ने कहा, लगभग एक महीने की एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है और अतिरिक्त खरीद लगातार जारी है। तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से अधिक सिलिंडर की आपूर्ति कर रही हैं। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए व्यावसायिक सिलिंडरों का आवंटन 50 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। पीएम मोदी सभी राज्यों के सीएम से आज करेंगे बात उधर, पीएम मोदी शुक्रवार शाम को पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी जंग को लेकर मुख्यमंत्रियों से बात करने वाले हैं। पीएम मोदी की ये बातचीत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली है। सामने आया है कि इस बैठक में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत सभी प्रयासों में आपसी तालमेल सुनिश्चित करना है। आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव वाले राज्यों को इस बैठक में शामिल नहीं किया जाएगा। इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से आयोजित की जाएगी। वहीं सरकार ने कहा, हर भारतीय के लिए लगभग दो महीने की निरंतर आपूर्ति उपलब्ध है, चाहे वैश्विक परिस्थितियां कैसी भी हों। साथ ही अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कुछ देशों में जहां ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, राशनिंग, ऑड-ईवन नियम और पेट्रोल पंप बंद होने जैसी स्थिति है, वहीं भारत में ऐसी किसी भी आपातकालीन उपाय की जरूरत नहीं है। नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रेल-डीजल के दाम देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर कंपनियों में शामिल नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बाद लिया गया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसका असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है। बताया जा रहा है कि 28 फरवरी के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें लंबे समय से स्थिर बनी हुई थीं, जिससे ईंधन विपणन कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ रहा था। विनोद उपाध्याय / 26 मार्च, 2026