प्रशासन के दावे फेल, पेट्रोलियम पदार्थों की नहीं हो पा रही पर्याप्त आपूर्ति बालाघाट (ईएमएस). शहर में पेट्रोल-डीजल को लेकर मचे हाहाकार ने दूसरे दिन भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं होने दीं। गुरुवार को सुबह से ही पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं, लेकिन अधिकांश पंपों पर ईंधन नहीं मिलने से लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। इस संकट ने आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालांकि, गुरुवार की शाम को अन्य पंपों में भी पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति शुरु कर दी गई थी। ईंधन की किल्लत के चलते नौकरीपेशा लोग समय पर दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने में परेशानी उठानी पड़ी। मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऑटो और टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर भी संकट गहरा गया है, क्योंकि ईंधन के अभाव में वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। जहां शहर के पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल रहा, वहीं जिला मुख्यालय से बाहर के पंपों पर स्थिति सामान्य बनी रही। ग्रामीण क्षेत्रों में वाहन चालकों को बिना ज्यादा इंतजार के पेट्रोल-डीजल मिलता रहा। घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर लोग शहर के एक-दो पंपों पर ही सीमित मात्रा में पेट्रोल-डीजल वितरण होने से हालात और बिगड़ गए। लोग सुबह से लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन कई लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। इससे नागरिकों में आक्रोश भी देखने को मिला। गुरुवार की सुबह नगर के बस स्टैंड परिसर में संचालित खंडेलवाल पेट्रोल पंप से ही पेट्रोलियम पदार्थों का वितरण किया जा रहा था। जिसके कारण इस पंप में वाहन चालकों की अधिक भीड़ नजर आई। शेष पंपों में पेट्रोल-डीजल नहीं दिया गया या फिर रिजर्व स्टॉक की सूचना नजर आई। सोशल मीडिया की खबर ने बढ़ाई दहशत पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल संदेश ने लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया। हालांकि प्रशासन ने पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आई। ऐसे में लोगों को लगने लगा है कि यह सिर्फ अफवाह नहीं, बल्कि वास्तविक संकट है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्थिति को स्पष्ट करते हुए नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पंपों पर मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए, ताकि कालाबाजारी और अव्यवस्था पर रोक लग सके। पेट्रोल संकट ने न सिर्फ लोगों की जेब पर असर डाला है, बल्कि शहर की रफ्तार को भी थाम दिया है। भानेश साकुरे / 26 मार्च 2026