क्षेत्रीय
29-Mar-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। क्या ऑपरेशन थिएटर भी पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है...। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने ‘ग्रीन एनेस्थीसिया’ पहल के जरिए इस सवाल का सशक्त जवाब दिया है। यहां अब मरीजों का इलाज न केवल सुरक्षित तरीके से किया जा रहा है, बल्कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए आधुनिक और जिम्मेदार तकनीकों का भी उपयोग हो रहा है। सिम्स द्वारा शुरू की गई यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार का उदाहरण बन रही है। ऑपरेशन थिएटर में उपयोग होने वाली एनेस्थीसिया गैसों के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए संस्थान ने पर्यावरण हितैषी तकनीकों को अपनाना शुरू किया है। दरअसल, सर्जरी के दौरान इस्तेमाल होने वाली गैसें जैसे डेसफ्लुरेन और नाइट्रस ऑक्साइड, अत्यधिक प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। इनका असर कार्बन डाइऑक्साइड से कई गुना अधिक होता है और ये लंबे समय तक वातावरण में बनी रहती हैं। हर साल बड़ी संख्या में होने वाली सर्जरी से इन गैसों का उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसका प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर रोजाना 10 से 12 घंटे तक इन गैसों के संपर्क में रहते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में ‘ग्रीन एनेस्थीसिया’ पहल मरीजों के साथ-साथ चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। सिम्स प्रबंधन के प्रमुख कदम सिम्स ने ग्रीन एनेस्थीसिया को लागू करने के लिए कई प्रभावी उपाय किए हैं- टी.आई.वी.ए. (टोटल इंट्रावेनस एनेस्थीसिया) इस तकनीक में प्रोपोफोल और मिडाजोलम जैसी दवाओं को नस के माध्यम से दिया जाता है, जिससे गैसों का उपयोग कम हो जाता है और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव घटता है। लो फ्लो एनेस्थीसिया तकनीक इसमें कम मात्रा में गैस देकर मरीज को सुरक्षित एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे गैस की खपत और प्रदूषण दोनों में कमी आती है। आधुनिक उपकरणों का उपयोग गैस लीकेज को नियंत्रित करने वाली तकनीकों के जरिए ऑपरेशन थिएटर के बाहर प्रदूषण फैलने की आशंका कम की जा रही है। किफायती और प्रभावी प्रणाली यह पूरी व्यवस्था न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रही है। विशेषज्ञों की राय... 1. नियंत्रित और सीमित गैस उपयोग से मरीज को सुरक्षित एनेस्थीसिया मिलता है और पर्यावरण को भी कम नुकसान पहुंचता है। डॉ. मधुमिता मूर्ति, विभागाध्यक्ष (एनेस्थीसिया), सिम्स। 2. ग्रीन एनेस्थीसिया भविष्य की जरूरत है। इसके व्यापक उपयोग से चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक बदलाव आएगा। डॉ. रमणेश मूर्ति, डीन, सिम्स मनोज राज 29 मार्च 2026