राज्य
29-Mar-2026


* नई तकनीक अपनाने में पिछड़ रहा गुजरात, छात्रों के भविष्य और सुरक्षा से हो रहा समझौता : हेमांग रावल अहमदाबाद (ईएमएस)| गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता हेमांग महिपतराम रावल ने राज्य सरकार के “डिजिटल गुजरात” के दावों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस आधुनिक दौर में भी गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसईबी) की मार्कशीट आज भी पुराने, दशकों पुराने फॉर्मेट में दी जा रही है। उन्होंने इस स्थिति को “छात्रों के भविष्य के साथ संस्थागत अन्याय” बताते हुए सरकार की नीतियों और इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न लगाया। रावल ने कहा कि देश के अन्य राज्य और राष्ट्रीय बोर्ड आज ब्लॉकचेन, QR कोड, डिजिटल सिग्नेचर और DigiLocker जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे हैं, जबकि गुजरात बोर्ड अब भी कागज़ आधारित पुरानी और असुरक्षित प्रणाली में फंसा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया, “डिजिटल भारत के दौर में क्या ऐसी पुरानी मार्कशीट व्यवस्था स्वीकार्य है? क्या सरकार इस सच्चाई को मानने के लिए तैयार है?” रावल के अनुसार, यह अंतर केवल तकनीक का नहीं बल्कि छात्रों को मिलने वाले अवसरों और सुरक्षा से भी जुड़ा है। अन्य बोर्ड्स बनाम गुजरात बोर्ड: स्थिति स्पष्ट कर्नाटक बोर्ड: ब्लॉकचेन सिस्टम के जरिए डेटा पूरी तरह सुरक्षित और छेड़छाड़ से मुक्त महाराष्ट्र बोर्ड: डिजिटल सिग्नेचर और QR कोड, जिससे सेकंडों में ऑनलाइन सत्यापन CBSE / NIOS: DigiLocker इंटीग्रेशन, डिजिटल एक्सेस और वैश्विक मान्यता गुजरात बोर्ड (GSEB): कागज़ आधारित पुरानी प्रणाली, फोटो, QR कोड, जन्म तिथि और माता के नाम का अभाव सरकार “डिजिटल गुजरात” के बड़े दावे करती है, लेकिन जब छात्रों के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज—मार्कशीट—में ही डिजिटल सुरक्षा और वैश्विक स्वीकार्यता का अभाव है, तो ये दावे केवल घोषणाओं और भाषणों तक सीमित रह जाते हैं। इस स्थिति के कारण छात्रों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। फर्जी मार्कशीट और दस्तावेज़ धोखाधड़ी की संभावना बढ़ती है, विदेश में पढ़ाई या नौकरी के लिए दस्तावेज़ सत्यापन में देरी होती है और डिजिटल सुविधाओं के अभाव में छात्रों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। कांग्रेस की प्रमुख मांगें: कक्षा 10 और 12 की मार्कशीट में तुरंत QR कोड और ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा लागू की जाए छात्र का फोटो, जन्म तिथि और माता का नाम अनिवार्य किया जाए डिजिटल सिग्नेचर प्रणाली लागू की जाए DigiLocker के साथ पूर्ण इंटीग्रेशन किया जाए इन सुधारों के लिए सरकार समयबद्ध एक्शन प्लान घोषित करे कांग्रेस ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे पर तुरंत और प्रभावी कदम उठाए, ताकि गुजरात के छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। सतीश/29 मार्च

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देवघर(ईएमएस)।गैस की किल्लत ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं देवघर में एक संस्था मुश्किल हालात में भी सेवा का दीप जलाए हुए है।सदर अस्पताल परिसर में श्रील फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करा रहा है।वर्ष 2020 से शुरू इस पहल के तहत संस्था हर दिन सुबह और शाम मिलाकर करीब 300 लोगों को मात्र 10 रुपये में भरपेट भोजन करा रही है।इन दिनों गैस की भारी किल्लत के कारण भोजन बनाना चुनौती बन गया है लेकिन फाउंडेशन से जुड़ी महिलाओं ने हार नहीं मानी।अब लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाकरई सेवा को लगातार जारी रखा जा रहा है। संस्था ने बताया कि फिलहाल भोजन करने वालों को सामान्य पानी पिलाया जा रहा है। ऐसे में बैंकों और बड़े संस्थानों से अपील की गयी है कि यहां एक आरओ सिस्टम लगवाने में सहयोग करें, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल भी मिल सके।फाउंडेशन ने शहरवासियों, दानदाताओं और संस्थानों से खाद्य सामग्री और आर्थिक सहयोग की अपील की है, ताकि यह सेवा निरंतर चलती रहे।संस्था के सचिव राकेश वर्मा ने क