नई दिल्ली (ईएमएस)। विंध्य क्षेत्र में बहुतायत में औषधीय महत्व के पौधे पाए जाते हैं। ऐसे ही पौधों में शामिल है पत्थरचट्टा का पौधा है। इस पौधे को आयुर्वेद में अत्यंत प्रभावी और चमत्कारी औषधि के रूप में जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार पत्थरचट्टा एक ऐसा पौधा है, जिसे बहुत अधिक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती और यह तेजी से विकसित होता है। इसकी ऊंचाई सामान्यतः एक से दो फुट तक होती है और इसके मोटे, रसीले पत्तों में भरपूर औषधीय गुण पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह पौधा ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक आसानी से देखा जा सकता है। मध्य प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में इसकी प्रचुर उपलब्धता इसे घरेलू जड़ी-बूटी के रूप में लोकप्रिय बनाती है। आयुर्वेदिक जानकार पत्थरचट्टा को ‘ब्रह्म औषधि’ भी कहते हैं, क्योंकि यह खासतौर पर गुर्दे की पथरी को गलाने में सहायक माना जाता है। इसके नियमित सेवन से मूत्र मार्ग साफ रहता है और पथरी बनने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही यह हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बताया जाता है, क्योंकि यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है। त्वचा संबंधी समस्याओं में भी पत्थरचट्टा का उपयोग प्रभावी माना गया है। यदि किसी व्यक्ति को चोट, सूजन या घाव हो जाए, तो इसके पत्तों का रस निकालकर प्रभावित स्थान पर लगाने से सूजन कम हो सकती है और घाव भरने में सहायता मिलती है। इसके अलावा बवासीर जैसी समस्याओं में भी इसे लाभकारी माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अमरपत्ता जैसे नामों से भी जाना जाता है, जो इसकी पहचान को और व्यापक बनाता है। इसके सेवन के विभिन्न तरीके बताए जाते हैं। सामान्यतः इसका 10 से 15 मिलीलीटर रस सुबह-शाम लिया जा सकता है। चूर्ण के रूप में 1 से 3 ग्राम दिन में दो बार सेवन करने की सलाह दी जाती है, जबकि काढ़े के रूप में 20 से 30 मिलीलीटर मात्रा उपयोगी मानी जाती है। त्वचा पर लगाने के लिए इसका रस सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है। गुर्दे की पथरी के उपचार में इसकी उपयोगिता को लेकर लोगों के बीच गहरा विश्वास है। इसके अलावा यह हृदय, त्वचा, मूत्र और पाचन संबंधी कई समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है। कुल मिलाकर पत्थरचट्टा एक ऐसा प्राकृतिक औषधीय विकल्प है, जो सही तरीके और संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर कई बीमारियों के उपचार और बचाव में सहायक साबित हो सकता है। सुदामा/ईएमएस 30 मार्च 2026