नई दिल्ली,(ईएमएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जामई एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने हत्या के मामलों में जान गंवाने वाले युवकों के परिवारों की त्रासदी का फायदा उठाकर सोशल मीडिया के जरिए लाखों रुपये का चंदा इकट्ठा किया, लेकिन यह राशि पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंचाई गई। इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है और दिल्ली पुलिस के पास दो अलग-अलग परिवारों ने गंभीर शिकायतें दर्ज कराई हैं। विवाद की शुरुआत 7 मार्च को चांदनी चौक के स्क्रैप कारोबारी मोहम्मद अरीब की हत्या के बाद हुई। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद शोएब जामई संवेदना व्यक्त करने उनके घर पहुंचे और वहां एक वीडियो रिकॉर्ड किया। बाद में इस वीडियो को उनके आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक क्यूआर कोड के साथ पोस्ट किया गया। अरीब के भाई मोहम्मद अदीब ने डीसीपी को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि यह क्यूआर कोड ‘सादिया फातिमा’ नामक किसी अज्ञात महिला के नाम पर था, जिससे परिवार का कोई संबंध नहीं है। अदीब का दावा है कि इस माध्यम से लगभग 7 से 8 लाख रुपये जुटाए गए, जबकि परिवार को कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। जब परिवार ने आपत्ति जताई, तो उन्हें बताया गया कि यह आईटी टीम की तकनीकी गलती थी और केवल मामूली रकम ही जमा हुई है। इसी तरह का एक और मामला मानसरोवर पार्क इलाके से सामने आया है। सिराजुद्दीन अंसारी नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई है कि नवंबर 2025 में उनके नाबालिग बेटे की हत्या के बाद भी इसी तरह का चंदा अभियान चलाया गया था। अंसारी का आरोप है कि शोएब जामई ने उनके बेटे के नाम और वीडियो का इस्तेमाल कर सादिया फातिमा के क्यूआर कोड के जरिए पैसे जुटाए, लेकिन उन्हें फूटी कौड़ी भी नहीं दी गई। अंसारी ने स्पष्ट किया कि वे अपने बेटे के नाम पर किसी भी तरह का अवैध फंड इकट्ठा करने के खिलाफ हैं। इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि जामई को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का करीबी माना जाता है। दूसरी ओर, शोएब जामई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका दावा है कि विपक्षी दलों से जुड़े लोग और पार्टी के कुछ पूर्व सदस्य एआईएमआईएम की छवि खराब करने के लिए पीड़ित परिवारों को गुमराह कर रहे हैं। जामई का कहना है कि उन्होंने अपने बैंक स्टेटमेंट और साक्ष्य जांच एजेंसियों को सौंप दिए हैं। फिलहाल, पुलिस इस पूरे वित्तीय लेनदेन और क्यूआर कोड से जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके। वीरेंद्र/ईएमएस/30मार्च2026