- हाईकोर्ट से मिला कर्मचारी को न्याय ग्वालियर,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से सामने आए एक अहम फैसले में स्पष्ट किया गया है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी उसके वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं होते। अदालत ने कहा कि यदि सेवा काल में किसी कर्मचारी के साथ पदोन्नति या अन्य लाभों को लेकर अन्याय हुआ है, तो उसके निधन के बाद भी परिवार को न्याय मिल सकता है। मामला वरिष्ठ एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर डॉ. राधाकृष्ण शर्मा से जुड़ा है। वर्ष 2002 की विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया में उनके जूनियर्स को प्रमोशन दे दिया गया, जबकि उनके खिलाफ लंबित आपराधिक प्रकरण और गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) का हवाला देकर उनकी पदोन्नति रोक दी गई थी। बाद में वे प्रकरण में बरी हो गए, लेकिन पदोन्नति नहीं दी गई। वर्ष 2008 में उन्होंने याचिका दायर की, हालांकि सुनवाई के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे ने मामले को आगे बढ़ाया। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद माना कि विभाग ने गलत तरीके से पदोन्नति रोकी थी। अदालत ने आदेश दिया कि डॉ. शर्मा को 28 अक्टूबर 2002 से पदोन्नत माना जाए और बकाया वेतन, वरिष्ठता व सेवानिवृत्ति लाभ उनके परिवार को दिए जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना विधिवत प्रतिकूल एसीआर बताए उसे पदोन्नति रोकने का आधार बनाना कानून के खिलाफ है। नंदिनी परसाई/30 मार्च 2026