क्षेत्रीय
31-Mar-2026
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- हाईकोर्ट से दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज जबलपुर, (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल को पुन: राहत नहीं मिली। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने शरद जायसवाल की दूसरी जमानत अर्जी भी सुनवाई के बाद खारिज कर दी । अपने आदेश में एकलपीठ ने कहा कि यह मामला संगठित आर्थिक अपराध से जुड़ा है। इसमें कई स्तरों पर अवैध लेन-देन और नेटवर्क शामिल हैं और आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। रिहा होने पर दोबारा अपराध करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा ऐसे में आरोपी को इस स्टेज पर जमानत देना उचित नहीं है। गौरतलब हो कि परिवहन विभाग के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा से यह मामला जुड़ा हुआ है। उसकी मासिक आय मात्र 28 हजार रुपये थी, फिर भी उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपार संपत्ति अर्जित की। आरो‎प है कि उसने यह संपत्ति अपने परिजनों और करीबी सहयोगियों के नाम पर खड़ी की, जिसमें वर्तमान आरोपी शरद जायसवाल भी शामिल हैं। बताया जाता है कि मामला प्रकाश में आने के बाद की गई जांच में सामने आया कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कई महंगी संपत्तियां, करोड़ों के फिशरीज कॉन्ट्रैक्ट, पेट्रोल पंप, वेयरहाउस, स्कूल प्रोजेक्ट और यहां तक कि दुबई में लगभग 150 करोड़ रुपये मूल्य का विला भी इस नेटवर्क से जुड़ी हुई है। इसके अलावा “अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी के जरिए कथित काले धन को वैध बनाने की साजिश रची गई। लोकायुक्त की 19 दिसंबर 2024 को की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के घर से 1.14 करोड़ रुपये नकद, सोने के जेवरात सहित कुल 3.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। वहीं सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के यहां से भी करीब 1.68 करोड़ रुपये नकद और 2.11 करोड़ रुपये की चांदी बरामद हुई। मामले में हवाला लेन-देन के भी संकेत मिले हैं, जिससे जांच और गहरी हो गई है। इस मामले में शुरूआती जांच लोकायुक्त ने की थी। लोकायुक्त में एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हुई। ईडी के अनुसार यह पूरा मामला “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” को छिपाने और वैध दिखाने का है, जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है। जांच में यह भी सामने आया कि इस मामले में शेल कंपनियों के जरिए अवैध धन को वैध बनाने का खेल चल रहा था। इस बहुचर्चित मामले में सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल को 10 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसी मामले में जमानत का लाभ पाने दायर की गई पहली जमानत अर्जी 29 जुलाई 2025 को वापस लेने पर उच्च न्यायालय से खारिज हुई थी। मामले में सुनवाई के दौरान शरद जायसवाल की ओर से दलील दी गई कि उसे इस कथित अपराध की जानकारी नहीं थी। ईडी की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विक्रम सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया। मामले पर 6 फरवरी को हुई लम्बी सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अजय पाठक / मोनिका / 31 मार्च 2026/ 3.24