अंतर्राष्ट्रीय
31-Mar-2026


करांची,(ईएमएस)। पाकिस्तान इन दिनों भयंकर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। पहले ही देश में एलपीजी की कमी जनता को परेशान कर रही थी, लेकिन अब क्वेटा, बलूचिस्तान में बड़ी गैस पाइपलाइन पर बम हमला हुआ है। 30 मार्च 2026 को क्वेटा शहर के बाहर अख्तराबाद वेस्टर्न बायपास पर सुई सदर्न गैस कंपनी की 18 इंच की मुख्य पाइपलाइन को विस्फोटक कर उड़ा दिया गया। विस्फोट इतना तेज था कि आग की लपटें दूर से दिखाई दीं और वॉल्व असेंबली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हमले के बाद क्वेटा और आसपास के जिलों जैसे हजारा टाउन, हजरगंजी, खरोटाबाद, मस्तुंग, कलात, पिशिन, कुचलाक और जियारत में गैस सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। प्राथमिक जांच में पता चला है कि पाइपलाइन के नीचे विस्फोटक लगाए गए थे। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। विशेषज्ञों और आम लोगों का मानना है कि यह केवल आतंकवादी हमला नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य देश को अस्थिर करना और ऊर्जा संकट को बढ़ाना है। बलूचिस्तान पहले ही पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत रहा है, जहां अलगाववादी विद्रोही और इस्लामिक आतंकवादी समूह अक्सर गैस पाइपलाइनों को निशाना बनाते रहे हैं। सुई सदर्न गैस कंपनी ने स्पष्ट रूप से बताया है, जबकि काउंटर टेररिज्म विभाग ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पाकिस्तान पहले से ही एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति के लिए कतर और यूएई पर निर्भर है। मध्यपूर्व में युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावटों के कारण आयात प्रभावित हो रहा है। घरेलू पाइपलाइनों पर हमला इस संकट को और बढ़ा रहा है। उद्योगों और आम नागरिकों को गैस कटौती का सामना करना पड़ रहा है, और ठंड के मौसम में खाना पकाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी प्रभावित हो रही हैं। पाकिस्तान सरकार ने पहले ही ऊर्जा बचत के लिए कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन पाइपलाइन पर हमला लोगों पर दबाव बढ़ाने और देश की आंतरिक अस्थिरता बढ़ाने का नया खतरा पेश करता है। फिलहाल पाइपलाइन की मरम्मत शुरू कर दी गई है, लेकिन पूरे इलाके में गैस आपूर्ति बहाल होने में समय लग सकता है। यह घटना पाकिस्तान के लिए चेतावनी है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आयात पर निर्भर नहीं रह सकती। बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की साजिशों को रोका जा सके। आशीष दुबे / 31 मार्च 2026