अंतर्राष्ट्रीय
31-Mar-2026


तेल अवीव,(ईएमएस)। इजरायल की राजधानी तेल अवीव में हाल ही में हवाई हमलों के सायरन 12 घंटे की शांति के बाद फिर से गूंज उठे हैं। अलग-अलग इलाकों में कुल 1,230 से अधिक बार अलर्ट बजाए गए, जो युद्ध की तीव्रता का संकेत हैं। इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने बीते 24 घंटों में ईरान के 170 ठिकानों पर हमला किया और करीब 400 बम और अन्य एम्यूनिशन का इस्तेमाल किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शांति की बातचीत की बात कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर दोनों पक्ष लगातार पलटवार कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान की वायु, नौसेना, मिसाइल लॉन्च क्षमता और मिसाइल निर्माण की औद्योगिक क्षमता को ध्वस्त करने को प्राथमिक लक्ष्य बनाया है। ट्रंप प्रशासन ने 4 से 6 हफ्ते की तय विंडो में युद्ध को समाप्त करने की योजना बनाई है। इसी वजह से इजरायल और अमेरिका बड़े रणनीतिक टार्गेट्स को जल्दी हासिल करने पर जोर दे रहे हैं, ताकि ईरान की सैन्य ताकत को न्यूनतम किया जा सके। वहीं ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी एमक्यूआई-9 रीपर ड्रोन और एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है, हालांकि अमेरिकी सेंटकॉम ने इसकी पुष्टि नहीं की। दोनों पक्ष सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी शक्ति दिखाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। इजरायली हमलों ने इस्फहान और तेहरान के सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया है। रिपोर्ट्स में मिसाइल डंप, कमांड और कंट्रोल स्ट्रक्चर को क्षति पहुँचने की जानकारी सामने आई है। आईडीएफ का मुख्य फोकस उन ठिकानों को नष्ट करना है जहाँ ईरान ने मिसाइलें और गोला-बारूद जमा किए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने चार प्रमुख लक्ष्यों पर जोर दिया: ईरान की वायु सेना, नौसेना, मिसाइल लॉन्चिंग क्षमता और मिसाइल निर्माण की औद्योगिक क्षमता को खत्म करना। अमेरिका इन टार्गेट्स को हासिल करने के करीब है, जिससे ईरान की भविष्य की सैन्य ताकत सीमित हो सके। यह युद्ध केवल मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों पक्ष मनोवैज्ञानिक युद्ध और नैरेटिव की लड़ाई भी जारी रखे हुए हैं। ट्रंप पर युद्ध को जल्दी खत्म करने का दबाव है, और इसी रणनीति के तहत इजरायल और अमेरिका ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। आशीष दुबे / 31 मार्च 2026