पटना,(ईएमएस)। बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और किशनगंज के एसडीओपी गौतम कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ा छापा मारा। आधा दर्जन ठिकानों पर तलाशी अभियान के दौरान आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि गौतम कुमार और उनके सहयोगियों ने बेनामी संपत्ति जुटाई थी। इस संपत्ति में सिलीगुड़ी में चाय का बागान, नोएडा और गुरुग्राम में फ्लैट, 25 से अधिक जमीन के प्लॉट, लग्जरी कारें और महंगी घड़ियां शामिल थीं। तलाशी में उनकी पत्नी पूनम देवी और महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर रजिस्टर्ड संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद किए। शगुफ्ता के आवास से ही सात प्लॉट से जुड़े दस्तावेज मिले, जिनकी कीमत करीब 60 लाख रुपये है। पूर्णिया में चार मंजिला मकान (3,600 वर्ग फुट) जिसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये आंकी गई, भी जब्त किया गया। इसके अलावा क्रेटा और थार जैसी महंगी कारें और बीमा निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले। तलाशी के दौरान किशनगंज स्थित सरकारी आवास से 1.37 लाख रुपये नकद जब्त किए और उनका मोबाइल फोन भी कब्जे में लिया गया। इतना ही नहीं पटना में नर्सिंग होम स्थापित करने से जुड़े दस्तावेज भी मिले। ये कार्रवाई तब हुई जब अधिकारियों को ज्ञात आय के अनुपात से अधिक संपत्ति का पता चला, जिसके बाद अदालत से तलाशी के आदेश प्राप्त किए गए। इस कार्रवाई के बाद किशनगंज में सरकारी अधिकारियों में बेचैनी और घबराहट का माहौल बन गया। कई अधिकारी एसडीओपी के आवास के पास इकट्ठा होकर घटनाओं पर जानकारी जुटाते नजर आए। गौतम कुमार का किशनगंज से लंबा जुड़ाव है। वे 1994 बैच में सब-इंस्पेक्टर के रूप में बिहार पुलिस में शामिल हुए और 1996 में पहली पोस्टिंग किशनगंज में हुई। 2012-13 में मोबाइल पुलिस अधिकारी के रूप में लौटे, बाद में इंस्पेक्टर और डीएसपी बने। 2023 में फिर किशनगंज के एसडीओपी बने। उनकी सेवा का बड़ा हिस्सा सीमांचल क्षेत्र में बीता, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार शामिल हैं। कुल मिलाकर यह मामला भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के संदर्भ में बिहार पुलिस के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। आशीष दुबे / 01 अप्रैल 2026