राष्ट्रीय
01-Apr-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र की मोदी सरकार के लिए एक अच्छी खबर आई है। देश में बेरोजगारी घट रही है और श्रम भागीदारी बढ़ी है। यानी अर्थव्यवस्था ‘क्राइसिस मोड’ में नहीं है। महिलाओं की आय तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी पुरुषों से उनका वेतन करीब 5,900 रुपए या 31 प्रतिशत तक कम है। इसका मतलब है कि समान मौके अभी भी नहीं मिले हैं। महिलाएं या कम वेतन वाले सेक्टर में हैं या समान काम के लिए कम पेमेंट पा रही हैं। यह जानकारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2025 (पीएलएफएस) में दी गई है। सर्वे बताता है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच नियमित वेतनभोगी बढ़े हैं। इसतरह वेतनभोगी पुरुषों का औसत वेतन 5.80 प्रतिशत, तब महिलाओं का 7.16 प्रतिशत बढ़ा। बीते एक साल में महिलाओं की औसत दैनिक मजदूरी 16 रु. बढ़कर 315 रु. हुई, जबकि इस दौरान पुरुषों की मजदूरी 1 रु. घटकर 455 रु. रह गई है। स्वरोजगार में लगे पुरुष महिलाओं से 3 गुना ज्यादा मा​सिक कमाई कर रहे हैं। एक महिला जहां अपने काम के लिए 6,374 रु. महीना कमा रही है, वहीं पुरुष 17,914 रु. तक कमा ले रहे हैं। सर्वे के मुताबिक देश की श्रमशक्ति में एक साल में मामूली 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान बेरोजगारी की दर 3.3 प्रतिशत से घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। शिक्षित लोगों के मध्य बेरोजगारी 0.5 प्रतिशत घटकर 6.5 प्रतिशत पर आ चुकी है। युवा बेरोजगारी दर भी अब ​सिंगल डिजिट में आ गई। सर्वे बताता है कि देश में अभी 67.8 प्रतिशत आबादी कम से कम माध्यमिक स्तर तक शिक्षित है। इसके बावजूद केवल 4.2 प्रतिशत लोगों को ही औपचारिक तकनीकी या व्यावसायिक प्रशिक्षण मिला है। यह बड़े स्किल गैप को दिखाता है। आशीष दुबे / 01 अप्रैल 2026