नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में ईरान का दूतावास हाल ही में युद्ध राहत के लिए चंदा जुटा रहा था, लेकिन अब पैसे को सीधे ईरान भेजना संभव नहीं है। इसकारण ईरानी दूतावास ने तय किया है कि दान की गई राशि का इस्तेमाल भारत में ही दवाएं खरीदने में होगा। राजनयिक और बैंकिंग नियमों के तहत विदेशी मिशनों को नकद या अनौपचारिक माध्यम से धन भेजने की अनुमति नहीं है, इसलिए सभी योगदान केवल निर्धारित बैंक खाते के जरिए स्वीकार किए जा रहे हैं। शुरुआत में ईरानी दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते के माध्यम से चंदा इकट्ठा किया, लेकिन बाद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में विशेष खाता खोला गया। 15 मार्च को नकद दान का विकल्प दिया था, लेकिन बाद में पूरी तरह औपचारिक प्रक्रिया में बदल दिया गया। ईरान ने स्पष्ट किया कि सभी दान केवल बैंक ट्रांजैक्शन के माध्यम से ही भेज जाएं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि भारत में दवाओं की खरीद में इस्तेमाल होगी। भारत पहले ही ईरान को दवाओं की एक खेप भेज चुका है। इन दवाओं को मशहद से नई दिल्ली लाने वाले ईरानी विमान को हाल ही में अमेरिकी हवाई हमले में नुकसान हुआ था। अब नई दिल्ली से दवाओं को एयरलिफ्ट करने के लिए ईरान दूसरी उड़ान भेजने की योजना बना रहा है। चंदा में मिले सोने और आभूषणों को भी स्थानीय बैंकों में जमा कर नकदी में बदलना होगा। इन्हें ‘डिप्लोमैटिक पाउच’ या अन्य राजनयिक माध्यमों से ईरान नहीं भेजा जा सकता। इस अभियान के दौरान ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट भी किए थे, जिन्हें बाद में विवाद के कारण हटा लिया गया। इनमें भारतीय कश्मीरियों को धन्यवाद देने और एक महिला को दान में सोना देते हुए दिखाया गया था। राजनयिक प्रोटोकॉल यानी ‘वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस’ में विदेशी मिशनों के द्वारा धन जुटाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन बैंकिंग अधिकार उन्हें सिर्फ आधिकारिक उद्देश्यों के लिए दिए जाते हैं। इस कारण, भारत में जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल अब स्थानीय स्तर पर ही दवाओं और आवश्यक वस्तुओं की खरीद में किया जाएगा, ताकि राहत कार्यों को असरदार ढंग से लागू किया जा सके। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026