राष्ट्रीय
04-Apr-2026
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दवाएं लेने आने वाले विमान को अमेरिका ने उड़ाया, ईरानी दूतावास दूसरा विकल्प तलाश रहा नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरानी दूतावास ने भारत में जुटाए गए दान का इस्तेमाल कर 40 टन दवाएं खरीद ली हैं, लेकिन युद्ध की वजह से इन्हें ईरान भेजने का रास्ता बंद हो गया है। इन दवाओं का कंसाइनमेंट नई दिल्ली में ईरानी दूतावास के पास है। पिछले कई दिनों से जम्मू और कश्मीर समेत भारत के लोगों ने ईरान के लिए भारी चंदा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते मशहद हवाई अड्डे पर हुए एक हवाई हमले में महान एयर का वह विमान क्षतिग्रस्त हो गया था। इस विमान को दवाइयों की खेप को लेने के लिए भारत आना था। इस घटना के बाद से ईरानी दूतावास लगातार इन दवाओं को अपने देश भेजने का कोई वैकल्पिक रास्ता तलाश रहा है। अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी-इजराइली सेना द्वारा जिस विमान पर हमला किया गया, उसे दूतावास द्वारा खरीदी गई 40 टन दवाओं का कार्गो लेने के लिए नई दिल्ली आने वाला था। हम अब कोई दूसरी व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में बिल्कुल भी आसान नहीं है। उन्होंने आगे जानकारी दी कि इससे पहले भारत में खरीदी गई दवाओं की दो छोटी खेप अर्मेनियाई मार्ग से तेहरान भेजी गई थीं। 40 टन वाली यह खेप दवाओं की सबसे बड़ी शिपमेंट है, जिसकी इस वक्त ईरान को तत्काल जरुरत है। अधिकारी के मुताबिक युद्ध के बीच भारत में जुटाए गए चंदे का इस्तेमाल इन दवाओं की खरीद के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ईरान में दवा कंपनियों और इससे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया है, जिसकी वजह से वहां दवाओं की भारी किल्लत होने की चिंता सता रही है। 30 मार्च को ईरानी दूतावास ने तेहरान के नागरिक उड्डयन संगठन के हवाले से कहा कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों को ले जाने वाले ईरानी विमान पर हमला करना एक युद्ध अपराध है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। नई दिल्ली में एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि ईरान ने इन फंड्स का इस्तेमाल भारत में दवाएं खरीदने के लिए करने की इच्छा जताई थी, जिसके लिए उन्हें अनुमति दे दी गई थी। दरअसल वियना कन्वेंशन विदेशी मिशनों द्वारा चंदा इकट्ठा करने के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहता, लेकिन यह मेजबान देश को उन्हें बैंकिंग अधिकार देने का निर्देश जरूर देता है। नियमों के तहत दूतावासों को दान प्राप्त करने के लिए अपने मुख्य बैंक खातों का इस्तेमाल करने की मनाही होती है, जिसके बाद शुरुआत में, ईरानी दूतावास ने अपने मुख्य बैंक खाते के जरिए ही दान मांगा था, लेकिन बाद में नियमों का पालन करते हुए इस विशेष उद्देश्य के लिए भारतीय स्टेट बैंक में एक अलग खाता खोला गया। सिराज/ईएमएस 04अप्रैल26 ---------------------------------