लखनऊ (ईएमएस)। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. आयतुल्लाह अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने लखनऊ में दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की शोक सभा में शामिल होने वाले भारतीयों के प्रति गहरा आभार जाहिर किया है। उन्होंने भारत को वफादारी और इंसानियत की भूमि बताया। उन्होंने कहा, वह (खामेनेई) उन लोगों की आवाज थे जिनकी अपनी कोई आवाज नहीं थी। जो लोग यहां आए हैं, वे अपनी मर्जी से आए हैं, किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया। यह स्पष्ट रूप से दिखाता हैं कि भारत की भूमि वफादारी, मानवता और नैतिकता की भूमि है। लखनऊ में इलाही ने छोटे इमामबाड़े में देर रात जनसमूह को संबोधित कर कहा कि ईरान जंग में मजबूती के साथ खड़ा है। ईरान किसी कीमत पर नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि यह जंग ईरान पर थोपी गई है। इस मौके पर आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने डॉ. इलाही को एक पत्र सौंपा, जिसमें मांग की गई कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज से भारतीय जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने की अनुमति मिले। अब्बास ने कहा कि हिंदुस्तान और ईरान के सदियों पुराने रिश्ते हैं। आज जब पूरी दुनिया समुद्री रास्तों पर जंग की वजह से ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, हम दरख्वास्त करते हैं कि जम्हूरिया-ए-इस्लामी ईरान अपनी रहनुमाई और सरपरस्ती में हिंदुस्तान आने वाले जहाजों को गुजरने की इजाजत देकर हमारे मुल्क के लिए पेट्रोलियम सप्लाई को बिना किसी रुकावट के जारी रखे। बुधवार को, ईरान के नए सर्वोच्च नेता और दिवंगत अयातुल्ला के बेटे मोजतबा खामेनेई ने देश के बुनियादी ढांचे को बहाल करने और युद्ध से हुई तबाही से उबरने के लिए व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की। ईरान के सरकारी चैनल के अनुसार, उनकी यह अपील इस्लामिक रिपब्लिक डे और नेशनल नेचर डे के मौके पर दिए गए संदेश का हिस्सा थी। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026