ज़रा हटके
05-Apr-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। हाल ही में जापानी वैज्ञानिकों की एक टीम ने उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर के कुरिल-कामचटका ट्रेंच में ऐसी खोज की है, जिसने वैज्ञानिक समुदाय को चौंका दिया है। यह खोज समुद्र के सबसे गहरे और अंधेरे हिस्से, जिसे हैडल जोन कहा जाता है, में की गई। यहां वैज्ञानिकों को चट्टानों से चिपके हुए काले रंग के छोटे-छोटे गोले दिखाई दिए। पहली नजर में ये किसी कीमती काले मोती या पत्थर जैसे प्रतीत हो रहे थे। इन गोलों का आकार लगभग 3 मिलीमीटर था और इनका बाहरी रूप लेदर जैसा दिखाई दे रहा था। वैज्ञानिकों ने हाई-टेक रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) की मदद से इन्हें बाहर निकाला और जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा। जांच के दौरान जब इन रहस्यमयी गोलों को खोला गया, तो उनके भीतर दूधिया रंग का तरल पदार्थ और विकसित हो रहे भ्रूण पाए गए। होक्काइडो विश्वविद्यालय के डॉ. केइची काकुई के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च में डीएनए परीक्षण के जरिए यह पुष्टि हुई कि ये किसी बाहरी ग्रह के जीव नहीं, बल्कि प्लैटीहेल्मिंथेस संघ के फ्लैटवर्म की एक नई प्रजाति के अंडे हैं। यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार इतनी गहराई पर फ्लैटवर्म के प्रजनन का प्रत्यक्ष प्रमाण मिला है। जहां यह खोज हुई, वहां समुद्र की गहराई करीब 6.2 किलोमीटर है। इस गहराई पर पानी का दबाव इतना अधिक होता है कि वह लोहे की मोटी चादरों को भी मोड़ सकता है। यहां दबाव सामान्य समुद्र तल की तुलना में लगभग 600 गुना ज्यादा होता है। ऐसे में वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतने कोमल जीव इस अत्यधिक दबाव और ठंडे वातावरण में जीवित कैसे रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार इन अंडों की बाहरी परत ही इनके जीवित रहने का राज है। यह परत चमड़े जैसी सख्त और काले रंग की होती है, जो विशेष प्रकार के पिगमेंटेशन के कारण मजबूत बनती है। यही संरचना इन अंडों को भारी दबाव से बचाती है। साथ ही यह परत समुद्र की गहराई में मौजूद सूक्ष्मजीवों से भी भ्रूण की रक्षा करती है। इस खोज ने गहरे समुद्र में जीवन की संभावनाओं को लेकर वैज्ञानिकों की सोच बदल दी है। अब तक माना जाता था कि इतनी गहराई और अत्यधिक दबाव वाले वातावरण में जटिल जीवों का विकास और प्रजनन लगभग असंभव है, लेकिन इस नई खोज ने साबित कर दिया है कि जीवन उन स्थानों पर भी अस्तित्व में रह सकता है, जिन्हें अब तक ‘डेथ जोन’ माना जाता था। बता दें कि अंतरिक्ष में चांद, शुक्र और मंगल जैसे ग्रहों की खोज में मानव लगातार आगे बढ़ रहा है, लेकिन अपनी ही धरती अब भी कई अनसुलझे रहस्यों को समेटे हुए है। वैज्ञानिक भले ही ब्रह्मांड के दूर-दराज हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हों, मगर धरती के महासागरों की गहराइयों में छिपे राज आज भी पूरी तरह सामने नहीं आ पाए हैं। सुदामा/ईएमएस 05 अप्रैल 2026