राष्ट्रीय
06-Apr-2026
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:: एएसआई की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट का दिया हवाला; खंडपीठ ने शुरू की नियमित सुनवाई, मुस्लिम पक्ष ने मांगी दस्तावेजों की प्रतियां :: इंदौर (ईएमएस)। धार जिले के ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर सोमवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष ने पुरजोर तरीके से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह विवादित परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक मंदिर है और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इसे मस्जिद नहीं माना जा सकता। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की वर्ष 2024 की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट उनके दावों की पुष्टि करती है। हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया कि परिसर की संरचना में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां, संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, हवन कुंड और स्तंभों पर उकेरे गए प्रतीक स्पष्ट रूप से इसके मंदिर होने का प्रमाण देते हैं। :: परमार कालीन वैभव और आक्रमणों का उल्लेख :: सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस भव्य संरचना का निर्माण धार के परमार वंश के राजा भोज ने 1034 ईस्वी में करवाया था। अधिवक्ता जैन ने तर्क दिया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा बार-बार किए गए हमलों और हिंदू प्रतीकों को मिटाने की कोशिशों के बावजूद, आज भी वहां मूल मंदिर के अवशेष मौजूद हैं। उन्होंने कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी एएसआई संरक्षित स्मारक का मौलिक धार्मिक चरित्र बदला नहीं जा सकता, इसलिए वहां केवल हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। :: मुस्लिम पक्ष ने जताई सर्वे पर आपत्ति :: लगभग दो घंटे चली इस सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने हिंदू पक्ष द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मुस्लिम पक्ष ने पूर्व में भी एएसआई की 2000 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सर्वे के दौरान कई तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और एएसआई ने उन वस्तुओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया है जो बाद में वहां रखी गई थीं। :: एएसआई रिपोर्ट के मुख्य अंश :: हाई कोर्ट के आदेश पर किए गए वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान विवादित ढांचे के नीचे परमार कालीन एक विशाल संरचना के अवशेष मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान ढांचे का निर्माण पुराने मंदिर के ही स्तंभों और अन्य सामग्रियों का उपयोग करके किया गया है। :: वर्तमान व्यवस्था :: विदित हो कि एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेशानुसार, वर्तमान में हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार को पूजा करने और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति है। अदालत ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मामले की नियमित सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी। प्रकाश/06 अप्रैल 2026