नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि बड़े सार्वजनिक निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर ठेकों में बहुजन उद्यमियों दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को शामिल करने में गंभीर कमी है। उन्होंने लोकसभा में उठाए गए प्रश्न (अतारांकित प्रश्न संख्या 6264) में बताया कि बीते पांच साल में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दिए गए ठेकों की जानकारी मांगने पर केंद्र सरकार के पास एससी/एसटी और ओबीसी उद्यमियों को मिले ठेकों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं था। राहुल गांधी के अनुसार, मोदी सरकार की नीति लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से कम से कम 25 प्रतिशत सार्वजनिक खरीद सुनिश्चित करती है, जिसमें एससी/एसटी स्वामित्व वाले व्यवसायों के लिए 4 प्रतिशत लक्ष्य रखा गया है। लेकिन सबसे बड़े और लाभकारी ठेकों में यह अनुपालन अनिवार्य नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने माना कि ठेकों का कुल डेटा उपलब्ध है, लेकिन सामाजिक वर्ग के उद्यमियों को दिए गए ठेकों की ट्रैकिंग के लिए कोई सिस्टम नहीं है। इसका कारण यह बताया गया कि निर्माण ठेकों के लिए इस प्रकार की ट्रैकिंग अनिवार्य नहीं है। राहुल गांधी ने इस मामले को केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक ऐसा जानबूझकर बनाया गया सिस्टम बताया जो मोदी सरकार की नीतियों के जरिए सामाजिक और आर्थिक न्याय को कमजोर करता है। उनका कहना है कि इससे बहुजन उद्यमियों को बड़े ठेकों से वंचित रखा गया है। संसदीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल में केंद्रीय सार्वजनिक निर्माण ठेकों की संख्या और मूल्य लगातार बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से 2025-26 में 8,402 ठेके दिए गए, जिनकी कुल कीमत 16,587 करोड़ रुपए थी। राहुल गांधी की यह आलोचना मुख्य रूप से बड़े ठेकों में सामाजिक वर्गीय प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता के अभाव को उजागर करती है। इस मुद्दे ने बहुजन उद्यमियों की आर्थिक भागीदारी और सरकारी ठेकों में समान अवसर सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया है। आशीष दुबे / 07 अप्रैल 2026