ईरान जंग में दिल्ली से बेहतर रिश्ते बना रहा मॉस्को नई दिल्ली (ईएमएस)। रूस और भारत के बीच हाल के समय में बढ़ती नजदीकियों के पीछे कई रणनीतिक और आर्थिक कारण हैं। ईरान में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अनिश्चित किया है। इसके बाद भारत ने फिर रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदना शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियां अप्रैल में करीब 6 करोड़ बैरल तेल रूस से ले रही हैं। इसके अलावा भारत रूस से गैस (एलएनजी) और खाद (फर्टिलाइज़र) भी आयात करने की योजना बना रहा है, क्योंकि खाड़ी देशों से सप्लाई में कमी आ रही है। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। यह संकेत देता है कि दोनों देश अपने संबंधों को और गहरा करने के इच्छुक हैं। खास बात यह है कि 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार रूस से एलएनजी सप्लाई फिर शुरू हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दोस्ती भावनाओं से ज्यादा आपसी हितों पर आधारित है। भारत और रूस दोनों एक बहुध्रुवीय (मल्टीपोलर) विश्व व्यवस्था चाहते हैं, जहां किसी एक देश का दबदबा न हो। इस संदर्भ में चीन का बढ़ता प्रभाव दोनों के लिए चिंता का कारण है। भारत और रूस, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे मंचों के जरिए चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं। एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अगर भारत-रूस साझेदारी मजबूत नहीं रहती, तब रूस को चीन पर अधिक निर्भर होना पड़ता और भारत को अमेरिका के और करीब जाना पड़ता। लेकिन अमेरिका के बदलते रुख और नीतियों से दोनों देश कुछ हद तक निराश भी हैं। यही वजह है कि वे एक-दूसरे के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत का बड़ा बाजार रूस के लिए आकर्षक है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था इसलिए टिक पाई क्योंकि भारत और चीन ने उससे व्यापार जारी रखा। इस कारण रूस भारत को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। उदाहरण के लिए, रूस द्वारा एस-400 रक्षा प्रणाली की समय पर डिलीवरी में देरी हुई है। इसके अलावा वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता, खासकर अमेरिका और उसके नेतृत्व की नीतियों के कारण, भारत के लिए भविष्य में संतुलन बनाए रखना कठिन हो सकता है। वहीं कूटनीतिक जानकार का कहना है कि भारत ने रूस के साथ दोस्ती को मजबूत करके मास्को चीन के पाले में पूरी तरह से जाने से रोक दिया। वहीं पाकिस्तान को भी रुस से दूर कर दिया। उन्होंने कहा कि रूस भारत पर इसलिए भरोसा करता है क्योंकि उसके बाजार का आकार बहुत बड़ा है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लगाने के बाद रूस केवल इसलिए बचा रहा क्योंकि चीन और भारत लगातार रूस से व्यापार करते रहे। अमेरिका से भारत और रूस दोनों ही निराशा अभी पिछले महीने ही रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की तारीफ की थी। उन्होंने कहा कि यह दोस्ती समय की परीक्षा में खरी उतरी है। अमेरिकी एक्सपर्ट माइकल रुबिन का कहना है कि रूस ईरान युद्ध का फायदा उठाकर दिल्ली के साथ अपने रिश्ते को मजबूत कर रहा है। इससे पहले रूस भारत को सौदा करने के बाद भी एस-400 की समय पर आपूर्ति नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस दोनों की अमेरिका को लेकर भी साझा निराशा है। आशीष दुबे / 07 अप्रैल 2026