09-Apr-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सीआरपीएफ ‘शौर्य दिवस’ के मौके पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देश की रक्षा में उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद कर 1965 के कच्छ के रण में ‘सरदार पोस्ट’ की ऐतिहासिक लड़ाई को याद किया। क्या थी घटना 9 अप्रैल 1965 को, कच्छ के सुनसान रण में करीब 150 सीआरपीएफ जवान पाकिस्तान की 3500 सैनिकों वाली इंफ्रैट्री ब्रिगेड के हमले का सामना कर रहे थे। संख्या में कम होने के बावजूद, जवान चट्टान की तरह डटे रहे और दुश्मन की घुसपैठ को रोकने में सफल रहे। इस वीरता के कारण 34 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जिसमें दो अधिकारी भी शामिल थे, जबकि चार को युद्धबंदी बनाया गया। सैनिकों की इस वीरता के कारण पोस्ट पर दुश्मन का कब्जा नहीं हो सका। सीआरपीएफ के वे वीर जनाव थे......नायक किशोर सिंह, कांस्टेबल किशन सिंह, कांस्टेबल ज्ञान चंद, कांस्टेबल हुड्डू राम, कांस्टेबल शमशेर सिंह और कांस्टेबल सिंधवीर प्रधान। इन 6 जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, “1965 में इसी दिन सीआरपीएफ के निडर योद्धा ‘सरदार पोस्ट’ पर एक अभेद्य दीवार की तरह डटकर खड़े हुए। उन्होंने दुश्मन के आगे बढ़ने के प्रयासों को कुचलकर देश के इतिहास में बहादुरी का गौरवशाली अध्याय लिखा। उन्होंने शौर्य दिवस पर जवानों की बहादुरी को याद कर उन्हें सलाम किया। सीआरपीएफ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर वीर जवानों की याद में कहा, “आज हम बहादुरों में सबसे बहादुर को सम्मान देते हैं। #शौर्य दिवस पर डीजी और सीआरपीएफ के सभी रैंक हमारे नायकों के अदम्य साहस को सलाम करते हैं।” ‘सरदार पोस्ट’ की यह लड़ाई न केवल सीआरपीएफ के साहस की मिसाल है, बल्कि यह देश की रक्षा के प्रति बलिदान और समर्पण का प्रतीक भी है। 9 अप्रैल हर साल #शौर्य दिवस के रूप में याद किया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उन वीर जवानों की वीरता और बलिदान को हमेशा याद रखें। इस ऐतिहासिक मौके पर देशभर के नागरिकों और सुरक्षा बलों ने उन रणबांकुरों को सलाम किया, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी मातृभूमि की रक्षा की। आशीष दुबे / 09 अप्रैल 2026