क्षेत्रीय
11-Apr-2026


शिक्षकों की आक्रोश रैली में टीईटी परीक्षा के विरोध में गुंजे नारे नैनपुर (ईएमएस ) । मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश में शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके विरोध में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा नगरपालिका मंगल भवन नैनपुर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। ब्लाक संयोजक नरेन्द्र सिंह चौहान, अमरसिंह चंदेला, मनीष कटकवार, अजय सोनी, अनुपमा तिविरी, प्रीती खालको, रश्मि मरावी के नेतृत्व और संजीव सोनी, दिलीप शरणागत, मुरलीमनोहर कौशल, इंद्रेश तिवारी, नफीस खान, शंकरदयाल बाजपेयी के मार्गदर्शन में 7000 शिक्षकों की ऐतिहासिक रैली निकालकर नगर की गलियों को टीईटी परीक्षा विरोधी नारों से भर दिया। नगर की गलियों और मुख्य बाजार से भ्रमण करते हुए शिक्षकों की रैली एसडीएम आसुतोष महादेव ठाकुर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये टीईटी परीक्षा संबंधी फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करने और नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को पेंशन एवं ग्रेच्युटी में नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ देने की मांग की है। धरना स्थल में शिक्षकों ने अपने उद्बोधन में में बताया कि... शिक्षकों का क्या कसूर -- विश्व के विकसित राष्ट्र की बराबरी करना है तो हमारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार बहुत जरूरी है। इसलिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम में TET परीक्षा को अनिवार्य किया गया है और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी अधिनियम को लागू कराने हेतु शिक्षकों को TET परीक्षा उत्तीर्ण करने का आदेश जारी किया गया है। शिक्षकों का वेल क्वालीफाई होना बहुत जरूरी भी है, लेकिन जो शिक्षकों 5-25 वर्ष पहले तात्कालीन समय की निर्धारित योग्यताओं को पूरा करने के बाद शिक्षक बने थे। ‌इसमें शिक्षकों का क्या कसूर है? शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भी सरकार ने शिक्षकों से NCET के तहत TET की परीक्षा के बिना नियुक्ति दी गई, इसमें शिक्षकों का क्या कसूर? इसके बाद हमारी 20 वर्ष की सेवा अवधि को शून्य मानकर गुरुजी, शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक को 2018 में पुनः नियुक्ति दी गई और उस समय भी सरकार ने TET परीक्षा नहीं लिया, तो फिर इसमें भी शिक्षकों का क्या कसूर? शिक्षकों को प्रशिक्षण आदि से अपडेट करना चाहिए -- कोई भी देश या सरकार कितनी भी कठिन परीक्षा लेकर शिक्षकों की नियुक्ति कर दे, वो परीक्षा समय के साथ पुरानी होती जाती है। इसलिए सभी सरकारें समय समय पर आफलाइन प्रशिक्षण, ओनलाइन प्रशिक्षण और वर्तमान में कई एप्प के माध्यम से शिक्षकों को प्रशिक्षण देते रहते हैं और यही सही उपाय है शिक्षकों को हमेशा अपडेट बनाए रखने का। सर्विस के 25-30 साल बाद वर्तमान TET जैसी कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण करने का मापदंड बिल्कुल उचित नहीं कहा जा सकता। सेवानिवृत्त शिक्षक परिवार और समाज में बोझ -- सरकार का ये तुगलकी फरमान कि परीक्षा में असफल रहने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी अपमानजनक और अव्यवहारिक है। परीक्षा में असफल होकर सेवानिवृत्त होने वाला शिक्षक घर, परिवार और समाज में हमेशा अपमानित महसूस करेगा। ऊपर से इन शिक्षकों को पेंशन के नाम पर सिर्फ 2000-2500 हजार मिलेगा, जिससे वो आर्थिक रूप से भी परिवार और समाज में बोझ बनकर रह जाएगा और प्रतिदिन अपमानित होता रहेगा। ईएमएस / 11/04/2026