:: 8 मई से एन्क्रिप्शन हटाने के फैसले को चुनौती, कोर्ट ने कहा- पहले वैधानिक बोर्ड के समक्ष रखें अपनी बात :: इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इंस्टाग्राम द्वारा आगामी 8 मई से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा बंद करने के निर्णय के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को इस मामले में सबसे पहले भारतीय डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने को कहा है। खंडपीठ ने बोर्ड को निर्देशित किया है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर विधिवत सुनवाई कर एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए। स्थानीय अधिवक्ता पार्थ शर्मा द्वारा दायर इस जनहित याचिका (पीआईएल) में इंस्टाग्राम के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि 8 मई 2026 के बाद प्लेटफॉर्म पर एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग का समर्थन नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ता का तर्क है कि मेटा प्लेटफॉर्म्स के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम का यह कदम संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) का सीधा उल्लंघन है। एन्क्रिप्शन हटने से संदेशों की सुरक्षा और गोपनीयता खतरे में पड़ जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के तहत एक वैधानिक बोर्ड का गठन किया जा चुका है। याचिकाकर्ता ने सीधे हाईकोर्ट का रुख किया है, जबकि उन्हें पहले इस अधिनियम की धारा 18 के तहत गठित बोर्ड के पास जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को सात दिनों के भीतर डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बोर्ड को 6 मई 2026 से पहले इस पर निर्णय लेना होगा ताकि 8 मई की समयसीमा से पूर्व स्थिति स्पष्ट हो सके। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को बोर्ड के निर्णय की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 6 मई के लिए तय की है। प्रकाश/11 अप्रैल 2026