क्षेत्रीय
12-Apr-2026
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बालाघाट (ईएमएस). वारासिवनी में वारा रेलवे ओवरब्रिज के उद्घाटन को लेकर हुआ हालिया विवाद केवल एक कार्यक्रम का टकराव नहीं, बल्कि क्षेत्र की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब है। यह घटना स्थानीय राजनीति के कई परतों को उजागर करती है व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता, दलगत असहजता और आने वाले चुनावों की तैयारी। पूर्व विधायक प्रदीप जायसवाल का राजनीतिक सफर दिलचस्प रहा है। वे कांग्रेस से तीन बार और एक बार निर्दलीय विधायक रह चुके हैं। बाद में भाजपा में शामिल हुए, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के विवेक पटेल (विक्की पटेल) से हार का सामना करना पड़ा। हार के बावजूद प्रदीप जायसवाल की सक्रियता कम नहीं हुई है बल्कि वे लगातार क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं। यही सक्रियता अब टकराव का कारण भी बन रही है। चूंकि राज्य में भाजपा सत्तारूढ़ है, ऐसे में प्रदीप जायसवाल को प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अप्रत्यक्ष लाभ मिलता दिखाई देता है। वे विभिन्न कार्यक्रमों और परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी करते हैं, जिसे विधायक विवेक पटेल प्रोटोकॉल का उल्लंघन मानते हैं। उनका तर्क है कि वर्तमान जनप्रतिनिधि होने के नाते प्राथमिकता उन्हें मिलनी चाहिए। स्थिति को और जटिल बनाता है भाजपा का आंतरिक समीकरण। पूर्व विधायक योगेंद्र निर्मल भी भाजपा में हैं, लेकिन वे प्रदीप जायसवाल से दूरी बनाकर चलते हैं। यह दूरी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठनात्मक असहजता की ओर भी संकेत करती है। यानी भाजपा के भीतर ही एक स्पष्ट एकजुटता का अभाव दिखता है। अब नजर 2028 के विधानसभा चुनाव पर है। प्रदीप जायसवाल भाजपा से फिर चुनाव लडऩे की तैयारी में हैं, जबकि यह लगभग तय माना जा रहा है कि विवेक पटेल कांग्रेस से ही मैदान में उतरेंगे। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच अभी से राजनीतिक जमीन मजबूत करने की होड़ तेज हो गई है। ओवरब्रिज उद्घाटन को लेकर हुआ विवाद इसी व्यापक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का परिणाम है। यह केवल एक प्रतीकात्मक घटना नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी संघर्ष की झलक है जहां हर मंच, हर कार्यक्रम और हर विकास कार्य राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन चुका है। वारासिवनी में विकास परियोजनाएं अब केवल जनसुविधा का साधन नहीं रहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी हैं। जब तक स्पष्ट प्रोटोकॉल, आपसी समन्वय और राजनीतिक परिपक्वता नहीं आएगी, तब तक ऐसे टकराव होते रहेंगे । भानेश साकुरे / 12 अप्रैल 2026