- मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 67.9फीसद, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति/स्वरोजगार योजना में 42.99 प्रतिशत और भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना में 40.9 प्रतिशत राशि एनपीए में भोपाल(ईएमएस)। मध्य प्रदेश में सरकारी गारंटी के तहत दी गई विभिन्न योजनाओं के कर्ज का बड़ा हिस्सा डूबत खाते (एनपीए) में पहुंच गया है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में करीब 2100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बैंकों के लिए जोखिम बन चुकी है। सबसे ज्यादा असर मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में देखा गया है, जहां 67.9 प्रतिशत राशि एनपीए श्रेणी में चली गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति/स्वरोजगार योजना में 42.99 प्रतिशत और भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना में 40.9 प्रतिशत कर्ज डूबत खाते में दर्ज हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि इन योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया था, लेकिन वसूली की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक चुनौतियां, व्यवसायिक असफलता और निगरानी तंत्र की कमी इसकी प्रमुख वजहें हो सकती हैं। बढ़ते एनपीए से बैंकों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऋण वितरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। सरकार अब वसूली प्रक्रिया को मजबूत करने और योजनाओं की समीक्षा पर विचार कर रही है। नंदिनी परसाई 13 अप्रैल 2026