ज़रा हटके
15-Apr-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। क्या आपने कभी सोचा है कि पानी की हर बूंद गोल या लगभग गोलाकार ही क्यों होती है। कभी कोई चौकोर, तिकोन या आयताकार बूंद क्यों नहीं दिखती? क्या पानी की बूंदों को कोई खास नियम गोल आकार लेने के लिए मजबूर करता है? यह एक ऐसा साधारण सवाल है जिसका जवाब भौतिकी और रसायन शास्त्र के एक बेहद रोचक सिद्धांत में छिपा है – सरफेस टेंशन यानी पृष्ठ तनाव। इस रहस्य को समझने के लिए हमें पानी के अणुओं की संरचना को देखना होगा। पानी के अणु एक-दूसरे से बहुत मज़बूती से जुड़े होते हैं, जिसे कोहेसिव फ़ोर्स या ससंजक बल कहते हैं। एक पानी की बूंद के अंदर मौजूद अणु चारों तरफ से समान खिंचाव महसूस करते हैं, लेकिन सतह पर मौजूद अणु एक अलग व्यवहार दिखाते हैं। वे सिर्फ नीचे और बगल के अणुओं से खिंचते हैं, ऊपर की तरफ कोई खिंचाव नहीं होता क्योंकि वहां हवा होती है। इस वजह से, सतह के अणु अंदर की तरफ खिंचने की कोशिश करते हैं, जिससे पानी की सतह एक तनी हुई अदृश्य झिल्ली जैसी बन जाती है। यह तनाव पानी को ऐसे आकार में ढालने के लिए मजबूर करता है जिसका बाहरी सतह क्षेत्र सबसे कम हो। गणित और भौतिकी के नियमों के अनुसार, किसी भी निश्चित आयतन के लिए सबसे कम सतह क्षेत्र केवल गोले का ही होता है। यही वजह है कि पानी की छोटी बूंदें पूरी तरह गोलाकार हो जाती हैं। यदि बूंद चौकोर या तिकोन होती, तो उसकी सतह का क्षेत्रफल ज़्यादा होता, जिससे सरफेस टेंशन ज़्यादा ऊर्जा खर्च करता। प्रकृति हमेशा कम ऊर्जा वाले रास्ते चुनती है, इसलिए गोल आकार सबसे आदर्श और ऊर्जा-कुशल होता है। पत्तों पर या शीशे पर बनी बूंदें भी इसी कारण गोल-मटोल दिखती हैं। कुछ पत्तों की सतह, जैसे कमल का पत्ता, हाइड्रोफोबिक (पानी को दूर रखने वाली) होती है, जिसके कारण बूंद और भी ज़्यादा परफेक्ट गोल बनी रहती है। बहुत छोटी बूंदें (आमतौर पर 1-2 मिलीमीटर से कम) लगभग परफेक्ट स्फीयर होती हैं। लेकिन जैसे-जैसे बूंद का आकार बढ़ता है, गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव भी बढ़ने लगता है। गुरुत्वाकर्षण नीचे की तरफ खिंचाव पैदा करता है, जिससे बड़ी बारिश की बूंदें ऊपर से गोल और नीचे से थोड़ी चपटी हो जाती हैं, जिसका आकार कुछ हद तक हैमबर्गर जैसा हो जाता है। यदि बूंद और भी बड़ी (लगभग 4.5 मिलीमीटर से ज़्यादा) हो जाए तो गुरुत्वाकर्षण इतना मज़बूत हो जाता है कि बूंद टूटकर छोटी-छोटी बूंदों में बिखर जाती है, क्योंकि सरफेस टेंशन उसे एक साथ नहीं रख पाता। यह अद्भुत सिद्धांत सिर्फ बूंदों के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई और दिलचस्प उदाहरण हमारे आसपास मौजूद हैं। कुछ कीड़े पानी की सतह पर चल पाते हैं क्योंकि सरफेस टेंशन उन्हें सहारा देता है, ठीक वैसे ही जैसे एक अदृश्य जाल पर चल रहे हों। पानी का बुलबुला भी गोल क्यों होता है? क्योंकि अंदर की हवा बाहर की तरफ दबाव डालती है और सरफेस टेंशन उसे गोल बनाए रखता है। साबुन का पानी सरफेस टेंशन कम कर देता है, इसीलिए साबुन के घोल से बने बुलबुले पानी के बुलबुलों से बड़े और ज़्यादा देर तक टिकते हैं। सुदामा/ईएमएस 15 अप्रैल 2026