19 अप्रैल से सत्प दिवसीय श्रीराम कथा एवं मानस सम्मेलन का आयोजन सीहोर (ईएमएस) । शहर के बस स्टैंड स्थित श्री हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में रविवार से भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ महायज्ञ और प्राण-प्रतिष्ठ महोत्सव एवं श्रीराम कथा का शुभारंभ रविवार से आरंभ हो जाएगा। शहर के बस स्टैंड के पास जयंती कालोनी में भव्य यज्ञशाला का निर्माण किया गया है। वहीं पर प्रतिदिन श्रीराम कथा दोपहर बारह बजे और रात्रि में राम लीला का मंचन किया जाएगा। इसके लिए श्री-श्री 108 यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद के मार्गदर्शन में समिति के अध्यक्ष रुद्रप्रकाश राठौर, पंडित अनिल शास्त्री द्वारा यज्ञशाला की तैयारियां पूर्ण की गई है। अब रविवार को भव्य कलश यात्रा, पंचाग पूजन, मंडप प्रवेश, जलाधिवास, राम रक्षा स्त्रोत एवं हनुमान चालीसा पाठ तथा मानस सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। सभी यज्ञों में श्रीराम महायज्ञ सर्वश्रेष्ठ माना श्रीश्री 108 पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे बाबा ने बताया कि महायज्ञ में 84 जोड़ों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अब तक दो दर्जन से अधिक जोड़ों की सूची मिली है जो भी इस यज्ञ में बैठने का इच्छुक है, मंदिर समिति से संपर्क कर सकता है। 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ में आहुतियां दी जाएगी। रामायण में भी यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डाला गया है। भगवान राम का जन्म यज्ञ द्वारा हुआ। मां जानकी का विवाह एक विशाल यज्ञ द्वारा संपन्न हुआ। यज्ञ में दैवी शक्ति बलवान होती है और असुरता का नाश होता है। रावण को जब अपनी हार दिखती है तो वह यज्ञ का ही सहारा लेता है और अपने पुत्र मेघनाद को तांत्रिक यज्ञ कर अजेय शक्ति प्राप्त करने का आदेश देता है। मगर दैवी इच्छा के कारण उसका यज्ञ पूर्ण नहीं हो पाता। भागवत में भी यज्ञ की महिमा बताई गई है। सभी यज्ञों में श्रीराम महायज्ञ सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके करने से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष चारों पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है। साथ ही मानसिक संतुष्टि व शारीरिक पुष्टि मिलती है। यह पुत्र-पौत्र आदि का सुख देने वाला और शौर्य प्रदान करने वाला यज्ञ है। इस यज्ञ के करने से खोया हुआ राज्य वापस मिल जाता है और निर्धन को धन मिलता है। यह शत्रुओं का विनाश करने वाला व परम शाति देने वाला यज्ञ है। विमल जैन, १७ अप्रैल, २०२६