क्षेत्रीय
18-Apr-2026
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- शिक्षक की नियुक्ति को लेकर 17 साल चले केस में युगलपीठ का मानवीय निर्णय इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने एक अपील याचिका पर सुनवाई करते करीब सत्रह वर्ष से लम्बित शिक्षक की नियुक्ति के मामले में एकलपीठ के फैसले के विपरित मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुना शिक्षक को एक बार फिर अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। इसके पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी कि समय बीत जाने के कारण मामला निष्प्रभावी हो चुका है और उन्हें कोई राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि वे नियुक्ति की आयु सीमा पार कर चुके है। इसके खिलाफ शिक्षक ने युगलपीठ के समक्ष अपील याचिका दायर की। जिस पर सुनवाई करते युगलपीठ ने अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए फैसला सुनाया कि यदि इस याचिका का समय पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय होता तो याचिकाकर्ता सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति और पेंशन संबंधी लाभ पाने के हकदार हो सकते थे। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल समय बीत जाने को आधार बनाकर याचिका को खारिज करना उचित नहीं है, खासकर तब जब देरी न्यायिक प्रक्रिया के कारण हुई हो। युगलपीठ ने एकलपीठ के पूर्व आदेश को निरस्त कर मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। याचिका कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि उर्दू स्कूल देवास के प्राथमिक कक्षा के शिक्षक वसीम हाशमी ने वर्ष 2009 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वर्ष 2006 की भर्ती प्रक्रिया के तहत सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति की मांग की थी। तब उनकी आयु लगभग 43 वर्ष थी। मामला कोर्ट में लंबित रहा और फरवरी 2026 में इस पर फैसला आया। तब याचिकाकर्ता की उम्र लगभग 60 वर्ष हो चुकी थी। जिसके चलते ही एकल पीठ ने मामले में उम्र का हवाला देते आदेश दिया जिसके बाद युगलपीठ ने अपील याचिका पर सुनवाई करते देरी का कारण न्यायिक प्रक्रिया को माना और शिक्षक को मौका देने की बात कही। - आनंद पुरोहित/ 18 अप्रैल 2026