- आत्मशुद्धि करना साधु का लक्ष्य जबलपुर, (ईएमएस)। (गिरीडीह) तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। इस दीक्षा समारोह में ब्रम्हचारी सारांश भैया मुनि श्री 108 सारसागर महाराज, क्षुल्लक समादर सागर मुनि श्री 108 समादरसागर महाराज तथा बाल ब्रह्मचारी रुपेश भैया मुनि श्री 108 रुपसागर महाराज बने। दीक्षा प्रदान करने के उपरांत मुनि प्रमाणसागर महाराज ने नवदीक्षित मुनिराजों को संबोधित करते हुए कहा कि साधु बनने के बाद संसार के आकर्षण और विकार स्मरण आ सकते हैं, किंतु साधु का लक्ष्य इन सबसे ऊपर उठकर आत्मशुद्धि करना है। उन्होंने कहा कि मुनि बनने के पश्चात लोग पूजा करें, प्रशंसा करें, सम्मान दें या आलोचना करें — यह उनके भाव हैं, परंतु साधु का मार्ग इन सबसे परे होता है। “मैं साधु बना हूँ न पूजा पाने के लिए, न समाज से संरक्षण पाने के लिए, बल्कि अपने जीवन को पवित्र बनाने और मोक्ष-पथ को साधने के लिए।” उन्होंने भगवान महावीर से लेकर आचार्य कुंदकुंद तथा आचार्य विद्यासागर महाराज की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साधु का लक्ष्य अपने अंतर्मन को निर्मल करना है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कोई नया कार्य नहीं किया, बल्कि वही जिम्मेदारी निभाई है जो आचार्य गुरुदेव विद्यासागर महामुनिराज ने सन् 2019 में नेमावर में सौंपी थी। दीक्षा से पूर्व इन युवाओं ने आचार्य गुरुदेव से ब्रह्मचर्य व्रत लिया और वर्ष 2020 से सतत साधना में रत रहकर अपने जीवन को तप एवं संयम से तपाया तथा दीक्षा के योग्य बने। गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 20 तीर्थंकरों की मोक्ष नगरी श्री सम्मेदशिखर में यह जैनेश्वरी दीक्षा विशेष ऐतिहासिक रही, क्योंकि एक मुनिराज द्वारा दूसरे मुनिराज को दीक्षा प्रदान की गई। वस्त्र त्याग का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण एवं पावन रहा। नवदीक्षित मुनिराजों को पिच्छिका, शास्त्र तथा शुद्धि हेतु कमंडल गुरुभक्त परिवारों द्वारा भेंट किए गए। प्रातःकाल नवदीक्षार्थी मुनिराजों की बग्गी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु भक्ति की। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधोरा एवं अभय आदित्य ने किया। संघस्थ मुनि संधान सागर महाराज ने नवदीक्षित मुनिराजों का जीवन परिचय प्रभावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का ध्वजारोहण देश के भामाशाह अशोक पाटनी एवं श्रीमती सुशीला पाटनी (आर.के. मार्बल) द्वारा किया गया। दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रेमी, दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष गजेन्द्र जैन पाटनी (कुनकुरी) सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के श्रद्धालु उपस्थित रहे। - सुनील साहू / मोनिका / 18 अप्रैल 2026/ 05.52