सारंगपुर (ईएमएस)। नरेन्द्र जैन, सारंगपुर। नदी, नालों और कुओं की सफाई व संरक्षण के उद्देश्य से बड़े प्रचार-प्रसार के साथ चलाया गया जल गंगा संवर्धन अभियान नगर में अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका। कागज़ों और फोटो सत्रों में सक्रिय दिखा यह अभियान जमीनी स्तर पर लगभग निष्प्रभावी साबित हो रहा है। हालात यह हैं कि नगर के अधिकांश जल स्रोत आज भी गंदगी, कचरे और उपेक्षा के बीच अपनी बदहाली बयां कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा 19 मार्च से 30 जून तक चलाए जा रहे इस अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न संगठनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कपिल सागर सहित कई स्थानों पर तगाड़ी और फावड़े हाथ में लेकर फोटो खिंचवाए गए, लेकिन यह सक्रियता केवल दिखावे तक ही सीमित रही। अभियान समाप्त होते ही न तो किसी ने समीक्षा की और न ही यह जानने की कोशिश की कि वास्तव में कितने जल स्रोतों की सफाई हुई और कितने अब भी गंदगी में डूबे हुए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि जिन स्थानों पर स्वयं जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंचे, वहां भी सफाई कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया। ऐसे में उन जल स्रोतों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है, जहां कभी कोई पहुंचा ही नहीं। ऐतिहासिक सूरजकुंड की बिगड़ती तस्वीर नगर की ऐतिहासिक धरोहर सूरजकुंड आज बदहाली का प्रतीक बन चुका है। यहां स्थित विशाल शिवलिंग, जो लगभग चार फीट ऊँचा और दो फीट भूमि के भीतर बताया जाता है, स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि यह शिवलिंग स्वयंभू है और यहां कभी अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती थी। करीब 20–25 फीट गहरे इस कुण्ड का जल कभी नहीं सूखता था। यह एक प्राकृतिक भूमिगत जल स्रोत से जुड़ा हुआ था, जो इसे सदैव जल से भरा रखता था। कुण्ड के चारों ओर बनी पत्थर की मजबूत दीवारें आज भी प्राचीन स्थापत्य कला की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं—सैकड़ों वर्षों बाद भी इनमें दरार तक नहीं आई है। लेकिन आज यही पवित्र स्थल कचरे, झाड़ियों और अव्यवस्था से घिर चुका है। कुण्ड के भीतर बनी भगवान शिव, गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी गंदगी में दब चुकी हैं। जो स्थान कभी श्रद्धा, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र था, वह अब प्रशासनिक उदासीनता की कहानी कह रहा है। उपेक्षित कुएं और बावड़ियां: जिम्मेदारों की अनदेखी सारंगपुर में केवल सूरजकुंड ही नहीं, बल्कि अनेक पुराने कुएं और बावड़ियां भी उपेक्षा का शिकार हैं। वर्षों से इनकी कोई साफ-सफाई नहीं हुई है। कई स्थानों पर ये जल स्रोत कूड़े-कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि नगर के उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में स्थित एक कुआ, जो कभी भरपूर पानी से लबालब रहता था, आज पूरी तरह कचरे से पट चुका है। जिम्मेदार अधिकारियों ने इसकी सफाई की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। साथ ही नगर में ऐसे कई कुएं हैं, जिनका अस्तित्व अब केवल नाम मात्र का रह गया है। यदि समय रहते इनका संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ये ऐतिहासिक और उपयोगी जल स्रोत पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं। सवालों के घेरे में अभियान की गंभीरता जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्जीवन था, लेकिन जिस तरह से इसे केवल औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया, उससे उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या अभियान केवल फोटो और प्रचार तक सीमित था? क्या प्रशासन ने किसी भी स्तर पर निगरानी या समीक्षा की? क्या नगर के सभी जल स्रोतों की सूची बनाकर उनके संरक्षण की योजना बनाई गई? कराएगे सफाई नगर के कुए , बाबडियो को दिखवा कर उनमे फैला कचरा व गन्दगी को साफ कराएगे ताकि गर्मी मे जल स्त्रोतो मे पानी आ सके दीपक रानवे सीएमओ नपा सारंगपुर ईएमएस /18/04/2026