राष्ट्रीय
20-Apr-2026


-आरक्षण विवाद और वोटर लिस्ट अपडेट के कारण चुनाव प्रक्रिया अटकी लखनऊ,(ईएमएस)। उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के चलते अब यह साफ होता जा रहा है कि चुनाव मई-जून 2026 में कराना संभव नहीं होगा। इससे जुड़ा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण भी इस पर असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन पहले 22 अप्रैल को प्रस्तावित किया था, लेकिन इसे अब बढ़ाकर 10 जून कर दिया गया है। यह चौथी-पांचवीं बार है जब मतदाता सूची की समयसीमा में बदलाव किया गया है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 21 अप्रैल से 28 मई तक वोटर लिस्ट के कंप्यूटरीकरण, दोहरे नामों को हटाने और डेटा सुधार का काम किया जाएगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून तक बूथ मैपिंग, वार्ड नंबरिंग और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम मतदाता सूची 10 जून को प्रकाशित होने की संभावना है। पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य की सीटों पर मतदान होना है, लेकिन आरक्षण व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद ने प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है। इसके साथ ही मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित होने से भी चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ा है। प्रारंभिक मतदाता सूची दिसंबर में जारी की गई थी, जिसमें करीब 12.69 करोड़ मतदाता शामिल थे। पिछले पंचायत चुनाव की तुलना में लगभग 40 लाख नए मतदाता जुड़े हैं। बड़ी संख्या में आपत्तियां और दावे आने के कारण सूची संशोधन में देरी हो रही है। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण नीति, कानूनी अड़चनें और तकनीकी प्रक्रियाओं में देरी के कारण पंचायत चुनाव अपने तय समय से काफी पीछे खिसक चुके हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और संभावित उम्मीदवारों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल स्थिति यह है कि जब तक आरक्षण से जुड़े विवाद और वोटर लिस्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक पंचायत चुनाव की तारीख तय होना मुश्किल है। ऐसे में ग्रामीण लोकतंत्र के इस सबसे बड़े चुनाव के लिए लोगों को और इंतजार करना पड़ सकता है। हिदायत/ईएमएस 20अप्रैल26