राज्य
21-Apr-2026


- बेटी और दामाद ने शव ले जाने और अंतिम संस्कार करने से किया इंकार भोपाल(ईएमएस)। राजधानी में स्थित भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने गौशाला में लगे पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। घटना में आगे की कार्यवाही करते हुए पुलिस प्रशासन ने संपर्क कर बीते दिन उसकी बेटी और दामाद को बुलाया। जिन्होंने शव देखने के बाद उसको अपने साथ ले जाने और अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद शव को हमीदिया अस्पताल के मॉर्चुरी रुम में सुरक्षित रखा गया है। गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार गुड्डू आदिवासी पिता बल्ला आदिवासी (53) रायसेन जिले के बाडी बरेली का रहने वाला है, उसने साल 2016 में हत्या की थी। अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद वह साल 2017 से केंद्रीय जेल गांधी नगर में बंद था। जेल में वह डेढ़ दर्जन बंदियों के साथ गौशाला को संभालने का काम करता था। वह रोजाना जेल के सामने स्थित गौशाला में दूध निकालने, चारा डालने से लेकर खेती के लिए ट्रेक्टर चलाने का काम करता था। गुड्डू आदिवासी 19 अप्रैल को भी रोजाना की तरह काम करने गया था। शाम को बोरिंग चलाने का कहकर वह अन्य बंदियों को जाने का बोलकर पीछे रह गया। जब वह काफी देर तक नहीं लौटा तो जेल प्रहरी उसे देखने मौके पर पहुंचा। उसने देखा कि उसका शरीर जामुन के पेड़ पर गाय बांधने की रस्सी से बने फंदे पर लटका हुआ है। गुड्डू आदिवासी को इलाज के लिये हमीदिया अस्पताल पहुचांया गया। जहॉ डॉक्टर ने उसे मृत घोषित करके गांधी नगर पुलिस को सूचना दी। गांधी नगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर शव पीएम के लिए भेज दिया। खुदकुशी के इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश भी हो गए हैं। - जेल में न कभी कोई मिलने आया और न ही मृतक पैरोल पर भी बाहर गया बताया गया है की मृतक कैदी गुड्डू आदिवासी को सजा होने के बाद उसकी पत्नी छोड़कर चली गई थी। उसके रिकॉर्ड में बेटी और दामाद का नाम और फोन नंबर था। जिनसे संपर्क कर उन्हें बुलाया गया। बेटी और दामाद ने आकर शव को देखा और उसको लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे अंत्येष्टि भी नहीं करेंगे। यह भी सामने आया की मृतक ने कभी पैरोल नहीं ली थी, और उससे जेल में मुलाकात करने कोई रिश्तेदार भी नहीं आता था। जेल प्रबंधन ने शव को गांधी मेडिको लीगल संस्थान के मॉर्चुरी रुम में सुरक्षित रख दिया है। जेल अधिकारियो का कहना है की यदि किसी बंदी के परिजन शव को नहीं स्वीकारते हैं, तो ऐसी स्थिति में भोपाल के भदभदा विश्राम घाट में बिजली शवदाह गृह में जेल प्रबंधन की तरफ से अंत्येष्टि कराने का प्रावधान हैं। जिसके लिए सभी वैधानिक कार्रवाई के लिए अनुमति जिला प्रशासन और जेल मुख्यालय से ली जाती है। कार्यवाही के बाद शव का अंतिम संस्कार कराया जायेगा। जुनेद / 21अप्रैल