भाजपा से अब तक कोई महिला विधायक नहीं कांग्रेस का महिला सांसद नहीं बालाघाट (ईएमएस). संसद में महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन और परिसीमन सुधार संविधान संशोधन बिल गिरने के बाद से देशभर में भाजपा ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है महिला आरक्षण की बहस के बीच बालाघाट के आंकड़े साफ बताते है कि दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा महिलाओं को अवसर देने के मामले में अलग-अलग रणनीति अपनाते रहे हैं। कुल मिलाकर बिना आरक्षण कांग्रेस ने विधानसभा लोकसभा में महिलाओं को ज़्यादा अवसर दिए और इसका लाभ भी उन्हें मिला वहीं भाजपा ने महिलाओं को अवसर भी कम दिए और जीत का प्रतिशत भी कम रहा । कांग्रेस का रिकॉर्ड - अवसर भी, जीत भी कांग्रेस ने समय-समय पर महिलाओं को टिकट देकर राजनीतिक मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया है। 1972 में लांजी से सुशीला बाई वानखेड़े को मौका मिला, हालांकि वे मामूली अंतर से हार गईं। 1985 में सईदा ख़ातून को बालाघाट से टिकट दिया गया, जो चुनाव हारने के बावजूद 1986 में राज्यसभा भेजी गईं यह दर्शाता है कि पार्टी ने उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाया। 2000 में किरनापुर उपचुनाव में पुष्पलता कावरे को टिकट मिला और वे जिले की पहली महिला विधायक बनीं। 2003 में उन्होंने अपनी जीत दोहराई।2008 में वह लांजी से हार गई । 2013 और 2018 में हिना कावरे लांजी से जीतकर विधायक बनीं, जबकि 2023 में अनुभा मुंजारे बालाघाट से जीत हासिल कर वर्तमान में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ा रही हैं।हिना लांजी से हार गई । हालांकि, कांग्रेस की कई महिला उम्मीदवारों को हार का भी सामना करना पड़ा जैसे 2004 में पुष्पा बिसेन और 2014 में हिना कावरे लोकसभा चुनाव हार गईं। फिर भी कुल मिलाकर कांग्रेस ने महिलाओं को लगातार अवसर दिए और उन्हें जीत तक भी पहुँचाया। भाजपा का रिकॉर्ड - अवसर कम, सफलता सीमित भाजपा ने भी समय-समय पर महिला उम्मीदवार उतारीं, लेकिन उनका रिकॉर्ड अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। 2003 में लता एलकर, 2004 में रेखा बिसेन, 2007 में धारेश्वरी भटेरे और 2018 में अनुपमा नेताम सभी को विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि भाजपा की कोई भी महिला उम्मीदवार अब तक जिले में विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाई है।हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में भारती पारधी की जीत पार्टी के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। 2023 चुनाव- स्पष्ट अंतर 2023 विधानसभा चुनाव में जिले की 6 सीटों में से कांग्रेस ने 2 पर महिला उम्मीदवार उतारीं, जबकि भाजपा ने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया। यह अंतर दोनों दलों की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है। कांग्रेस न सिर्फ ज्यादा अवसर देती है, बल्कि सफलता भी दिलाती है, जबकि भाजपा अभी भी महिला प्रतिनिधित्व में पीछे नजर आती है। आंकड़ों के आधार पर देखें तो महिला राजनीति में कांग्रेस की पकड़ लगभग दोगुनी प्रभावी दिखाई देती है। कांग्रेस का प्रदर्शन (विधानसभा + लोकसभा) कुल महिला उम्मीदवार (अब तक)-10 जीतने वाली - 4 पुष्पलता कावरे (2000, 2003) हिना कावरे (2013, 2018) अनुभा मुंजारे (2023) ( चुनावी जीत 5 बार हुई, लेकिन उम्मीदवार 4 अलग-अलग) हारने वाली- 6 जीत प्रतिशत-40 प्रतिशत हार प्रतिशत - 60 प्रतिशत भाजपा का प्रदर्शन कुल महिला उम्मीदवार-5 जीतने वाली- 1 भारती पारधी (लोकसभा 2024) हारने वाली-4 जीत प्रतिशत- 20 प्रतिशत हार प्रतिशत - 80 प्रतिशत भानेश साकुरे / 21 अप्रैल 2026