- राखड़ बाँध से रिसाव होने पर एचटीपीपी की दो इकाइयां हुई बंद कोरबा (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ प्रदेश में भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बीच कोरबा-पश्चिम स्थित हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (एचटीपीपी) के झाबू नवागांव राखड़ बाँध में रिसाव की समस्या सामने आने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। स्थिति को देखते हुए संयंत्र प्रबंधन ने एहतियातन 210-210 मेगावाट क्षमता वाली यूनिट 3 और 4 को बंद कर दिया है, जिससे करीब 420 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। जानकारी के अनुसार, बढ़ती गर्मी के कारण प्रदेश में बिजली की खपत 6800 मेगावाट के पार पहुंच गई है। ऐसे समय में उत्पादन में आई कमी ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। राज्य के तापीय संयंत्रों की उपलब्ध क्षमता करीब 2840 मेगावाट ही रह गई है, जिसके चलते कमी को पूरा करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से 4400 मेगावाट से अधिक बिजली ली जा रही है। संयंत्र प्रबंधन के मुताबिक, राखड़ बाँध में हाल ही में दोबारा रिसाव की स्थिति बनी थी। संभावित खतरे को देखते हुए बाँध की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया है। बाँध के तटबंध को मजबूत करने, रिसाव को रोकने और निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही राखड़ को रोकने के लिए जाली लगाने की तैयारी भी चल रही है। मानसून सीजन आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में मरम्मत कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि बारिश के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। साफ मौसम का भी कार्य में लाभ मिल रहा है। एचटीपीपी कोरबा-पश्चिम राज्य का सबसे बड़ा ताप विद्युत संयंत्र है, जिसकी कुल स्थापित क्षमता 1340 मेगावाट है। यहां 210 मेगावाट की चार इकाइयों और 500 मेगावाट की एक इकाई से उत्पादन होता है। सभी इकाइयों से निकलने वाली राखड़ का संग्रहण झाबू नवागांव बाँध में किया जाता है। संयंत्र के मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया कि बाँध में रिसाव को नियंत्रित करने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों इकाइयों में कोई तकनीकी खराबी नहीं है और मरम्मत कार्य पूरा होते ही इन्हें पुनः चालू कर दिया जाएगा। - (ईएमएस) 23 अप्रैल